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मंगल कांटा( Mangal Kanta)
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मंगल कांटा क्या है? / What is Mangal Kanta?

मंगल कांटा (जिसे कई बार 'टाइगर आई' या मंगल का विशेष उपरत्न कहा जाता है) एक अत्यंत प्रभावशाली और सुरक्षात्मक पत्थर है। ज्योतिष शास्त्र में इसे मंगल (Mars) ग्रह की ऊर्जा को संतुलित करने और नकारात्मक शक्तियों से बचने के लिए एक "सुरक्षा कवच" के रूप में देखा जाता है।

यह पत्थर दिखने में थोड़ा सख्त, भूरा और धारियों वाला हो सकता है, जो मंगल की उग्रता को नियंत्रित कर उसे सकारात्मक दिशा में मोड़ने का काम करता है। इसे अक्सर ताबीज या अंगूठी के रूप में पहना जाता है ताकि व्यक्ति के साहस और पराक्रम में वृद्धि हो सके।


यह किस रत्न का उपरत्न है? / Which Gemstone's Sub-stone is it?

मंगल कांटा मुख्य रूप से मूंगा (Red Coral) का उपरत्न माना जाता है।

  • मुख्य रत्न: मंगल ग्रह का प्रधान रत्न मूंगा है।

  • उपरत्न: मूंगा महंगा होने के कारण या कुछ विशेष कुंडली स्थितियों में (जहां मूंगा बहुत अधिक उग्र हो सकता है), मंगल कांटा पहनने की सलाह दी जाती है।

यह मूंगे के विकल्प के रूप में कार्य करता है और मंगल दोष (Manglik Dosha) के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक होता है।


मंगल कांटा के लाभ और विशेषताएं / Benefits and Features

  1. साहस और आत्मविश्वास: यह व्यक्ति के अंदर के डर को खत्म करता है और आत्मविश्वास (Self-confidence) बढ़ाता है।

  2. कर्ज से मुक्ति: ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, मंगल कांटा धारण करने से "ऋण मोचन" (कर्ज से मुक्ति) की प्रक्रिया तेज होती है।

  3. शत्रु बाधा: यह शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता दिलाने में मदद करता है।

  4. रक्त संबंधी विकार: चूंकि मंगल रक्त (Blood) का कारक है, इसलिए यह रत्न रक्त से जुड़ी बीमारियों और शारीरिक कमजोरी को दूर करने में सहायक माना जाता है।

  5. मंगल दोष का निवारण: जिन लोगों की शादी में मंगल दोष के कारण देरी हो रही है, उनके लिए यह बहुत लाभकारी होता है।


इसे कैसे प्रयोग में लाएं? / How to Wear and Use It?

मंगल कांटा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इसे विधि-विधान से धारण करना चाहिए:

  • धातु (Metal): इसे तांबे (Copper) या सोने (Gold) में पहनना सबसे उत्तम माना जाता है। पंचधातु का भी प्रयोग किया जा सकता है।

  • धारण करने का दिन: इसे मंगलवार (Tuesday) की सुबह सूर्योदय के समय धारण करना चाहिए।

  • शुद्धिकरण: धारण करने से पहले इसे गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करें और फिर हनुमान जी के चरणों में स्पर्श कराएं।

  • मंत्र: मंगल के बीज मंत्र "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" का कम से कम 108 बार जाप करें।

  • उंगली: इसे दाएं हाथ की अनामिका (Ring Finger) में पहनना चाहिए।


विशेष निर्देश:- हमारे केंद्र द्वारा प्रदान की गयी मंत्रविद्या,यंत्रविद्या,सिद्धसामग्री,एवं आयुर्वेदिक औषधि,और अन्य किसी भी सामग्री का हम आधिकारिक रूप से कोई भी गारंटी या जिम्मेदारी नहीं लेते। आप चैनल के विश्वास और चमत्कार को देखकर के स्वयं या दूसरों के हित के लिए प्रयोग कर सकते है।  

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