रत्नों के दिए गए दाम 6 कैरट के दाम है।
The prices given for the gemstones are for 6 carats.
माणिक्य रत्न (Ruby Stone), जिसे रत्नों का राजा (Ratnaraj) कहा जाता है, नवग्रहों के अधिपति सूर्य देव का प्रतिनिधित्व करता है। यह अपनी दिव्य आभा और शक्तिशाली ऊर्जा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। कैवल्य एस्ट्रो वर्ल्ड के अनुसार, एक शुद्ध और प्राकृतिक माणिक्य न केवल सौंदर्य बढ़ाता है, बल्कि व्यक्ति के जीवन में राजयोग और मान-सम्मान लेकर आता है।
माणिक्य 'कोरंडम' (Corundum) परिवार का सदस्य है। इसका लाल रंग इसमें मौजूद 'क्रोमियम' तत्व के कारण होता है।
रंग: यह हल्के गुलाबी से लेकर गहरे 'कबूतर के खून' (Pigeon Blood Red) जैसे लाल रंग का होता है।
कठोरता: हीरा के बाद यह सबसे कठोर रत्न है (Mohs scale पर 9)।
चमक: एक श्रेष्ठ माणिक्य को सूर्य की रोशनी में देखने पर उसमें से दिव्य किरणें निकलती प्रतीत होती हैं।
आत्मविश्वास में वृद्धि: सूर्य साहस का कारक है, अतः इसे धारण करने से भय दूर होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
प्रशासनिक सफलता: राजनीति, सरकारी नौकरी या नेतृत्व (Leadership) के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए यह रत्न अत्यंत लाभकारी है।
पिता से संबंध: ज्योतिष में सूर्य पिता का कारक है; माणिक्य धारण करने से पिता के साथ संबंधों में सुधार आता है और पैतृक संपत्ति का लाभ मिलता है।
स्वास्थ्य लाभ: यह रक्त संचार (Blood Circulation), हृदय रोग और आंखों की रोशनी के लिए उत्तम माना जाता है।
कैवल्य एस्ट्रो वर्ल्ड यह सुनिश्चित करता है कि आपको मिलने वाला प्रत्येक माणिक्य 100% प्राकृतिक, अनहीटेड (Unheated) और अनट्रीटेड (Untreated) हो। बाजार में मिलने वाले कांच या सिंथेटिक रत्नों से सावधान रहें। कैवल्य एस्ट्रो वर्ल्ड के रत्न प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं (जैसे IGI, GIA या सरकारी लैब) द्वारा प्रमाणित होते हैं, जो उनकी मौलिकता और ज्योतिषीय प्रभावशीलता की पूर्ण गारंटी देते हैं।
उत्तम धातु (Metal): माणिक्य को सोने (Gold) या तांबे (Copper) में जड़वाना सबसे शुभ होता है। चांदी में इसे धारण करने से बचना चाहिए।
उंगली (Finger): इसे दाहिने हाथ की अनामिका उंगली (Ring Finger) में धारण किया जाना चाहिए।
समय (Time): किसी भी शुक्ल पक्ष के रविवार (Sunday) को सूर्योदय के पश्चात सुबह 6:00 से 9:00 के बीच धारण करना चाहिए।
जिनका जन्म सिंह लग्न (Leo Ascendant) में हुआ हो, उनके लिए यह जीवनरत्न है।
मेष, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न के जातक भी ज्योतिषीय परामर्श के बाद इसे पहन सकते हैं।
यदि कुंडली में सूर्य नीच का हो, शत्रु राशि में हो या 6, 8, 12वें भाव में हो, तो बिना परामर्श के इसे धारण न करें।
रत्न पहनने से पहले उसकी नकारात्मक ऊर्जा निकालना और उसे सक्रिय करना आवश्यक है:
शुद्धिकरण: अंगूठी को गंगाजल, कच्चे दूध, शहद और शक्कर के घोल (पंचामृत) में 15-20 मिनट के लिए भिगो दें।
सक्रियण (Pran Pratishtha): लाल कपड़े पर सूर्य यंत्र या माणिक्य रखें। सूर्य देव का ध्यान करते हुए "ॐ घृणि सूर्याय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
धारण: मंत्र जाप के बाद धूप-दीप दिखाकर इसे सूर्य देव को स्पर्श कराएं और अनामिका में पहन लें।
पवित्रता: माणिक्य की शुद्धता बनाए रखने के लिए इसे समय-समय पर साबुन के हल्के पानी या गंगाजल से साफ करते रहें।
खंडित रत्न: यदि रत्न में कोई दरार (Crack) आ जाए या वह फीका पड़ जाए, तो उसे तुरंत बदल दें; खंडित रत्न अशुभ प्रभाव दे सकता है।
विपरीत रत्न: माणिक्य के साथ नीलम, हीरा और गोमेद कभी न पहनें, क्योंकि शनि, शुक्र और राहु सूर्य के शत्रु माने जाते हैं।
दान: ग्रहण के समय या किसी की मृत्यु के समय इसे उतार कर पवित्र स्थान पर रख दें और बाद में गंगाजल से शुद्ध करके पुनः पहनें।
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