Siddh Shwet Chandan Mala Choti | White Sandalwood Japa Mala for Mantra Jaap, Meditation, Puja & Spiritual Use
सफ़ेद चंदन की माला (White Sandalwood Mala) अपनी दिव्य सुगंध और शीतलता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इसका संबंध मुख्य रूप से भगवान विष्णु, भगवान शिव और शांति के ग्रह चंद्रमा से है। छोटी सफ़ेद चंदन की माला (जिसमें मनकों का आकार 4mm से 6mm होता है) एकाग्रता और मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
सफ़ेद चंदन एक अत्यंत मूल्यवान और पवित्र लकड़ी है, जिसे 'श्रीखंड चंदन' भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से दक्षिण भारत (कर्नाटक और तमिलनाडु) के जंगलों में पाई जाती है। आध्यात्मिक दृष्टि से इसे सात्विकता का प्रतीक माना जाता है। इसकी सुगंध मन को शांत करने और ध्यान (Meditation) में गहराई लाने के लिए जानी जाती है।
प्राकृतिक लकड़ी: यह चंदन के पेड़ के सबसे भीतरी और सुगंधित हिस्से (Heartwood) से बनाई जाती है। पेड़ जितना पुराना होता है, उसकी लकड़ी उतनी ही सुगंधित और गुणकारी होती है।
निर्माण प्रक्रिया: लकड़ी के छोटे टुकड़ों को काटकर और रगड़कर छोटे-छोटे गोल मनके बनाए जाते हैं।
बनावट: "छोटी माला" में सूक्ष्म आकार के 108+1 मनके होते हैं। इसे अक्सर सफेद या क्रीम रंग के रेशमी धागे में पिरोया जाता है। असली चंदन की माला में एक स्वाभाविक, मंद और मनमोहक खुशबू हमेशा बनी रहती है।
सफ़ेद चंदन की माला धारण करने के लिए मन की शुद्धता अनिवार्य है:
शुभ दिन: इसे गुरुवार (Thursday) के दिन धारण करना सबसे उत्तम माना जाता है।
शुद्धिकरण: माला को गंगाजल से शुद्ध करें। चंदन की लकड़ी को कच्चे दूध में अधिक देर नहीं भिगोना चाहिए, बस हल्का स्पर्श कराकर पुनः गंगाजल से साफ कर लें।
पूजन: माला को भगवान विष्णु के चरणों में रखें। सफ़ेद फूल और अक्षत अर्पित करें।
मंत्र जाप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का 108 बार जाप करें।
धारण: मंत्र जाप के बाद इसे श्रद्धापूर्वक गले में धारण करें।
मानसिक शांति: यह अत्यधिक तनाव, क्रोध और चिड़चिड़ेपन को कम कर मन को शीतल रखती है।
एकाग्रता (Concentration): छात्रों और साधना करने वालों के लिए यह याददाश्त और ध्यान लगाने की शक्ति बढ़ाती है।
सकारात्मक ऊर्जा: इसे धारण करने से आसपास की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और व्यक्ति में सकारात्मक विचारों का संचार होता है।
ग्रह शांति: यह चंद्रमा और गुरु (बृहस्पति) ग्रह के अशुभ प्रभावों को शांत कर जीवन में स्थिरता लाती है।
सौभाग्य: इसे धारण करने से मान-सम्मान में वृद्धि होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
सिद्ध करने की अवधि: यदि आप किसी विद्वान ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से इसे सिद्ध करवाते हैं, तो यह प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है।
अनुष्ठान विधि: ब्राह्मण द्वारा किसी शुभ मुहूर्त पर संकल्प लिया जाता है। इसके बाद वैदिक पुरुष सूक्त या विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ और विशेष आहुतियों के माध्यम से माला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। इस शास्त्रीय विधि के बाद माला तुरंत चैतन्य होकर अपना दिव्य प्रभाव दिखाना शुरू कर देती है।
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