Siddh Moonga Japa Mala Small Size | Red Coral Prayer Beads for Meditation, Puja & Spiritual Practice
मूंगा माला (Red Coral Mala) ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह की प्रतिनिधि मानी जाती है। छोटी मूंगा माला, जिसमें मनकों का आकार छोटा (सामान्यतः 4mm से 6mm) होता है, विशेष रूप से ऊर्जा, साहस और रक्त संबंधी दोषों के निवारण के लिए धारण की जाती है।
मूंगा एक रत्न है जो समुद्र की गहराइयों में रहने वाले 'पॉलीप्स' नामक समुद्री जीवों द्वारा बनाया जाता है। यह एक जैविक रत्न (Organic Gemstone) है। छोटी मूंगा माला देखने में अत्यंत आकर्षक, चमकदार और गहरे लाल या सिंदूरी रंग की होती है। इसका सीधा संबंध साहस और पराक्रम के देवता 'मंगल' से है।
प्राकृतिक स्रोत: समुद्र से प्राप्त कच्चे मूंगे की टहनियों को निकाला जाता है।
निर्माण प्रक्रिया: इन टहनियों को काटकर, घिसकर और पॉलिश करके छोटे-छोटे गोल या बेलनाकार मनकों का आकार दिया जाता है।
संरचना: "छोटी माला" में सूक्ष्म आकार के 108+1 मनके होते हैं। इन्हें अक्सर लाल रेशमी धागे में पिरोया जाता है। असली मूंगा छूने पर चिकना होता है और इसमें प्राकृतिक रूप से बारीक छिद्र या धारियां हो सकती हैं।
मूंगा माला धारण करने के लिए मंगल देव की कृपा प्राप्त करना आवश्यक है:
शुभ दिन: इसे मंगलवार (Tuesday) की सुबह, सूर्योदय के एक घंटे के भीतर धारण करना सबसे उत्तम है।
शुद्धिकरण: माला को पहले गंगाजल से धोएं, फिर कच्चे दूध में कुछ देर रखें और अंत में पुनः गंगाजल से साफ करें।
पूजन: माला पर लाल चंदन या सिंदूर का तिलक लगाएं और हनुमान जी या मंगल देव के चित्र के सामने रखें।
मंत्र जाप: 'ॐ हं हनुमते नमः' का 108 बार जाप करें।
धारण: जाप पूर्ण होने के बाद इसे श्रद्धापूर्वक गले में धारण करें।
मंगल दोष का निवारण: यह कुंडली में स्थित मांगलिक दोष के कुप्रभावों को कम करती है।
आत्मविश्वास और साहस: इसे धारण करने से डर और घबराहट दूर होती है तथा व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता बढ़ती है।
रक्त संबंधी लाभ: आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार, यह रक्त संचार (Blood Circulation) को सुधारने और रक्त विकार दूर करने में सहायक है।
कर्ज से मुक्ति: जो लोग कर्ज के बोझ से दबे हैं, उनके लिए मूंगा माला धारण करना शुभ माना जाता है।
शत्रु विजय: यह शत्रुओं पर विजय दिलाने और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता दिलाने में मदद करती है।
सिद्ध करने की अवधि: यदि आप किसी विद्वान ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से इसे सिद्ध करवाते हैं, तो यह प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है।
अनुष्ठान विधि: ब्राह्मण द्वारा किसी शुभ दिन संकल्प लेकर वैदिक मंगल मंत्रों के जप और विशेष आहुतियों (हवन) के माध्यम से माला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। इस शास्त्रीय विधि के बाद माला तुरंत प्रभावशाली और जाग्रत हो जाती है।
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