Siddh Haldi Mala 108 Beads | Turmeric Japa Mala for Mantra Jaap, Meditation, Puja & Spiritual Practice
हल्दी की माला (Haldi Mala) को ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) का स्वरूप माना जाता है। इसे 'हरिद्रा माला' भी कहते हैं। यह माला विशेष रूप से ज्ञान, सफलता और बाधाओं को दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
हल्दी की माला प्राकृतिक हल्दी की गांठों से बनी होती है। हल्दी को भारतीय संस्कृति में शुद्धता, सौभाग्य और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह माला बगलामुखी देवी की साधना और बृहस्पति ग्रह की शांति के लिए अनिवार्य मानी जाती है।
प्राकृतिक स्रोत: यह खेत से निकली सूखी हुई हल्दी की सुदृढ़ और ठोस गांठों से बनाई जाती है।
निर्माण प्रक्रिया: हल्दी की गांठों को विशेष रूप से सुखाया जाता है ताकि वे लंबे समय तक खराब न हों। इसके बाद इन्हें काटकर छोटे गोल या अंडाकार मनकों (Beads) का आकार दिया जाता है।
बनावट: इसमें आमतौर पर 108 मनके होते हैं। इसे पीले रंग के सूती या रेशमी धागे में पिरोया जाता है। यह माला छूने में थोड़ी खुरदरी हो सकती है और इसमें हल्दी की स्वाभाविक खुशबू होती है।
हल्दी माला धारण करने के लिए गुरु कृपा प्राप्त करना आवश्यक है:
शुभ दिन: इसे गुरुवार (Thursday) के दिन सुबह के समय धारण करना सबसे श्रेष्ठ है।
शुद्धिकरण: माला को गंगाजल से धोएं। फिर इसे थोड़े से केसर मिले हुए कच्चे दूध में कुछ देर रखें और पुनः शुद्ध जल से साफ करें।
पूजन: माला पर पीले चंदन का तिलक लगाएं और इसे भगवान विष्णु, गणेश जी या मां बगलामुखी के चरणों में रखें।
मंत्र जाप: 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' का 108 बार जाप करें।
धारण: जाप पूर्ण होने के बाद इसे श्रद्धापूर्वक गले में धारण करें।
गुरु दोष का निवारण: यह कुंडली में कमजोर बृहस्पति को मजबूत करती है, जिससे भाग्य का साथ मिलने लगता है।
ज्ञान और बुद्धि: छात्रों और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक है।
शत्रु विजय: मां बगलामुखी की साधना में हल्दी माला का प्रयोग शत्रुओं के नाश और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता के लिए किया जाता है।
मानसिक शांति: यह चिंता, तनाव और बुरे सपनों को दूर रखने में मदद करती है।
विवाह और संतान: जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही है या संतान प्राप्ति में बाधा है, उनके लिए यह माला शुभ फलदायी मानी जाती है।
सिद्ध करने की अवधि: यदि आप किसी विद्वान ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से इसे सिद्ध करवाते हैं, तो यह प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है।
अनुष्ठान विधि: ब्राह्मण द्वारा किसी शुभ दिन संकल्प लिया जाता है। इसके बाद वैदिक गुरु मंत्रों के जाप, पीत पुष्पों से अर्चन और विशेष आहुतियों (हवन) के माध्यम से माला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। इस शास्त्रीय विधि के बाद माला तुरंत सक्रिय होकर अपना फल देना शुरू कर देती है।
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