Siddh Karanguli Jaap Mala Large Size | Finger Mala for Mantra Counting, Puja, Meditation & Spiritual Use
करूंगली माला (बड़ी), जिसे आबनूस (Ebony) की लकड़ी की माला भी कहा जाता है, दक्षिण भारत में विशेष रूप से प्रसिद्ध है। छोटी माला के मुकाबले बड़ी माला (बड़े मनकों वाली) अधिक ऊर्जा संचित करने और गहरे ध्यान या कवच के रूप में धारण करने के लिए उपयोग की जाती है।
करूंगली एक अत्यंत दुर्लभ और कठोर लकड़ी है जो आबनूस (Ebony) के पेड़ से प्राप्त होती है। 'बड़ी' माला से तात्पर्य उन मनकों से है जिनका आकार सामान्यतः 10mm से 12mm या उससे अधिक होता है। बड़ी माला में लकड़ी का घनत्व अधिक होने के कारण इसकी चुंबकीय और सुरक्षात्मक शक्तियां बहुत प्रबल मानी जाती हैं। इसे भगवान मंगल ग्रह का स्वरूप माना जाता है।
प्राकृतिक लकड़ी: यह पुराने और परिपक्व आबनूस के पेड़ों के सबसे भीतरी भाग (Black Heartwood) से बनाई जाती है।
भारीपन: असली बड़ी करूंगली माला काफी भारी होती है। इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि यह लकड़ी पानी में डालते ही पत्थर की तरह डूब जाती है (यह तैरती नहीं है)।
निर्माण: लकड़ी को काटकर बड़े गोल मनकों का आकार दिया जाता है और उन्हें प्राकृतिक रूप से रगड़कर चमकाया जाता है। इसमें कोई रंग या केमिकल नहीं होता। इसे अक्सर मोटे काले या लाल धागे में पिरोया जाता है।
बड़ी करूंगली माला को धारण करने की विधि इस प्रकार है:
शुभ दिन: इसे मंगलवार की सुबह (सूर्योदय के समय) धारण करना सबसे उत्तम है।
शुद्धिकरण: माला को शुद्ध गंगाजल से धोएं। फिर इसे कुछ देर के लिए कच्चे दूध में डुबोकर रखें और पुनः शुद्ध जल से साफ करें।
अर्पण: इसे भगवान हनुमान जी या अपने इष्ट देव के सामने रखें।
मंत्र जाप: 'ॐ अंगारकाय नमः' या भगवान मुरुगन के मंत्रों का 108 बार जाप करें।
धारण: श्रद्धापूर्वक इसे गले में धारण करें। (नोट: इसे सोते समय या अशुद्ध अवस्था में उतारकर पवित्र स्थान पर रखना चाहिए)।
शक्तिशाली सुरक्षा कवच: बड़ी माला शरीर के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बनाती है, जो बुरी नजर, ईर्ष्या और नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) को पूरी तरह रोक देती है।
मंगल दोष का निवारण: यह कुंडली में स्थित भारी मंगल दोष के प्रभावों को शांत कर विवाह और भूमि संबंधी बाधाओं को दूर करती है।
व्यापार और करियर में वृद्धि: बड़े मनकों की ऊर्जा व्यावसायिक बाधाओं को दूर करने और शत्रुओं पर विजय पाने में सहायक होती है।
शारीरिक ऊर्जा: यह शरीर की सुस्ती और आलस्य को खत्म कर रक्त संचार (Blood Circulation) को सुचारू रखने में मदद करती है।
विद्युत चुंबकीय प्रभाव: यह आसपास की विद्युत चुंबकीय तरंगों के दुष्प्रभावों से शरीर की रक्षा करती है।
सिद्ध करने की अवधि: यदि आप किसी विद्वान ब्राह्मण या पंडित के माध्यम से इसे सिद्ध करवाते हैं, तो यह प्रक्रिया केवल 1 दिन (एक ही बैठक) में पूर्ण हो जाती है।
अनुष्ठान प्रक्रिया: ब्राह्मण द्वारा किसी तिथि या विशेष नक्षत्र के दौरान संकल्प लिया जाता है। इसके बाद वैदिक मंत्रों के संपुट पाठ और विशेष आहुतियों (हवन) के माध्यम से माला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है। इस शास्त्रीय विधि के बाद माला तुरंत जाग्रत होकर अपना पूर्ण प्रभाव दिखाना शुरू कर देती है।
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