सिद्ध धनदा लक्ष्मी आकर्षण इत्र
सेवा राशि (2150)
सिद्धि समय लगभग (3) दिन
?माता लक्ष्मी के बंगाली मंत्रों से अभिमंत्रित "सिद्ध महालक्ष्मी गुलाब इत्र" केवल एक सुगंध नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा पुंज है। 50 ग्राम की यह दिव्य औषधि आपके जीवन की दिशा बदलने में सक्षम है।
यहाँ इसका विस्तृत परिचय, लाभ, चमत्कार और प्रयोग विधि दी गई है:
सिद्ध महालक्ष्मी गुलाब इत्र (50 ग्राम)
यह इत्र विशेष रूप से पश्चिम बंगाल की प्राचीन तांत्रिक पद्धति और माता लक्ष्मी के गुप्त बंगाली मंत्रों द्वारा सिद्ध किया गया है। गुलाब की सात्विक खुशबू जब इन शक्तिशाली मंत्रों के साथ मिलती है, तो यह वातावरण की नकारात्मकता को सोखकर उसे लक्ष्मी के आकर्षण केंद्र में बदल देती है।
चमत्कारिक लाभ और प्रभाव
| क्षेत्र | प्राप्त होने वाले लाभ |
|---|---|
| आर्थिक लाभ | धन की बरसात, आय के नए स्रोत, और व्यापार में ग्राहकों की भारी वृद्धि। |
| बाधा मुक्ति | पैसों का बंधन, कर्जा और दरिद्रता का समूल नाश। |
| पारिवारिक शांति | घर के क्लेश, लड़ाई-झगड़े खत्म होकर प्रेम और शांति का वातावरण। |
| कैरियर/शिक्षा | नौकरी में प्रमोशन के मार्ग खुलना और बच्चों की एकाग्रता व पढ़ाई में सुधार। |
| विवाह/संबंध | विवाह में आ रही अड़चनों का दूर होना और मांगलिक कार्यों का संयोग बनना। |
| स्वास्थ्य/वास्तु | पुरानी बीमारियों में राहत, नकारात्मक ऊर्जा का अंत और 'वास्तु दोष' के प्रभाव का खात्मा। |
प्रयोग विधि (कैसे करें उपयोग)
इस इत्र का प्रभाव प्राप्त करने के लिए इसे शुक्रवार के दिन से आरंभ करना अनिवार्य है:
* शुक्रवार की सुबह: स्नान के बाद सफेद या गुलाबी वस्त्र धारण करें।
* अभिमंत्रण: इत्र की शीशी को माता लक्ष्मी के चरणों में रखकर 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः' का जाप करें।
* शरीर पर प्रयोग: प्रतिदिन पूजा के बाद अपनी अनामिका उंगली से इत्र को अपनी कलाई, कान के पीछे और नाभि पर लगाएं।
* छिड़काव विधि (घर/दुकान): * एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें सिद्ध इत्र की 5-7 बूंदें डाल दें।
* इस इत्र का प्रयोग लगातार 90 दिनों तक करना रहता है
शारीरिक तौर पर भी
*और घर या व्यापार संबंधित व्यवस्था में
* इस जल को अशोक या आम के पत्तों की सहायता से अपने पूरे घर, तिजोरी, व्यापारिक स्थल और मुख्य द्वार पर छिड़कें।
* समय: इसे सुबह और शाम (संध्या काल) दोनों समय करना अत्यंत लाभकारी होता है।
सावधानियां और परहेज
सिद्ध वस्तुओं की मर्यादा बनाए रखने से ही पूर्ण फल मिलता है:
* शुद्धता का ध्यान: छिड़काव के समय स्थान पूरी तरह स्वच्छ होना चाहिए। गंदे स्थान पर छिड़काव न करें।
* तामसिक भोजन: जिस घर में इस इत्र का प्रयोग हो रहा हो, वहां मांस, मदिरा या तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए।
* गोपनीयता: इस प्रयोग की चर्चा हर किसी से न करें; इसे पूर्ण श्रद्धा और गुप्त भाव से करें।
* नियमितता: इसे शुक्रवार से शुरू करके बिना नागा (Miss किए) प्रतिदिन जारी रखें।
> विशेष चमत्कार: इस इत्र के छिड़काव से घर का औरा (Aura) बदल जाता है। जहां भी इसका छिड़काव होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह इतना तीव्र हो जाता है कि नकारात्मक शक्तियां और वास्तु दोष अपना प्रभाव छोड़ देते हैं।
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