सिद्ध भाग्यलक्ष्मी आकर्षण अंगूठी (Siddha Bhagyalakshmi Akarshan Ring) एक अत्यंत प्रभावशाली ज्योतिषीय और आध्यात्मिक आभूषण है। इसे धारण करने का मुख्य उद्देश्य सोए हुए भाग्य को जगाना और जीवन में धन, वैभव एवं आकर्षण की वृद्धि करना है।
यह एक विशेष रूप से निर्मित अंगूठी है जिसे 'महालक्ष्मी' के आकर्षण बीज मंत्रों द्वारा चैतन्य किया जाता है। यह अंगूठी धारक के आभामंडल (Aura) को इतना प्रबल बना देती है कि वह सकारात्मक अवसरों और धन को अपनी ओर आकर्षित करने लगता है।
धातु (Metal): यह अंगूठी मुख्य रूप से अष्टधातु (आठ धातुओं का मिश्रण) या चांदी (Silver) में बनाई जाती है। शुक्र ग्रह की मजबूती के लिए चांदी सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है, जबकि सर्व-सिद्धि के लिए अष्टधातु का प्रयोग होता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में इसे सोने (Gold) में भी जड़ा जाता है।
परिमाण (Size/Weight): इसका वजन आमतौर पर 5 से 7 रत्ती के बीच होता है।
अंगूठी को धारण करने से पहले इसे सिद्ध करना अनिवार्य है:
मुहूर्त: इसे शुक्ल पक्ष के शुक्रवार, दीपावली, या 'रवि-पुष्य नक्षत्र' में सिद्ध करें।
शुद्धिकरण: अंगूठी को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं।
पूजन: माँ लक्ष्मी की मूर्ति के सामने लाल कपड़े पर अंगूठी रखें और कुमकुम, अक्षत व गुलाब का इत्र लगाएं।
मंत्र जाप: कमल गट्टे की माला से “ॐ श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” या “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी आगच्छ आगच्छ नमः” मंत्र का 11 या 21 माला जाप करें।
धूप-दीप: अंत में कपूर की आरती करें और अंगूठी को माँ के चरणों से स्पर्श कराएं।
आर्थिक समृद्धि: आय के नए स्रोत खुलते हैं और दरिद्रता का नाश होता है।
व्यक्तित्व में आकर्षण: इसे धारण करने वाले व्यक्ति की वाणी और व्यक्तित्व में एक सम्मोहन पैदा होता है, जिससे लोग प्रभावित होते हैं।
भाग्य का साथ: जो कार्य मेहनत के बाद भी सफल नहीं हो रहे थे, उनमें भाग्य का सहयोग मिलने लगता है।
शुक्र ग्रह की शांति: यह कुंडली में शुक्र दोष को दूर कर भौतिक सुख-सुविधाएं बढ़ाती है।
दिन: शुक्रवार की सुबह सूर्योदय के समय।
उंगली (Finger): इसे दाहिने हाथ (Right Hand) की अनामिका उंगली (Ring Finger) में धारण करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में अनामिका उंगली सूर्य और सफलता की कारक मानी जाती है, जो लक्ष्मी तत्व को सक्रिय करती है। (स्त्रियां इसे बाएं हाथ की अनामिका में भी पहन सकती हैं)।
अंगूठी की शक्ति बनाए रखने के लिए इन नियमों का कड़ाई से पालन करें:
पवित्रता: शौच जाते समय या शारीरिक संबंध बनाते समय इसे उतार कर किसी पवित्र स्थान पर रख दें।
नशा निषेध: इसे धारण करने के बाद मांस, मदिरा या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से बचें, अन्यथा इसका प्रभाव निष्क्रीय हो सकता है।
सूतक-पातक: परिवार में किसी के जन्म या मृत्यु (सूतक) के समय इसे उतार देना चाहिए और पुनः गंगाजल से धोकर ही पहनना चाहिए।
किसी को न दें: अपनी पहनी हुई अंगूठी कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति को पहनने के लिए न दें।
नियमित मंत्र: हर शुक्रवार को अंगूठी को धूप दिखाएं और लक्ष्मी मंत्र का कम से कम 11 बार जाप करें।
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