सिद्ध धन आकर्षण स्फटिक माला (Siddha Dhan Akarshan Sphatik Mala) को अध्यात्म और ज्योतिष में 'कांच की मणि' या 'सफेद पुखराज का विकल्प' माना जाता है। यह माला अपनी शीतलता और सकारात्मक ऊर्जा को संचित करने की अद्भुत क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।
स्फटिक एक प्राकृतिक पत्थर (Crystal Quartz) है जो पृथ्वी के भीतर लाखों वर्षों की प्रक्रिया से बनता है। यह पारदर्शी, चमकदार और स्पर्श में ठंडा होता है। जब इस माला को धन के विशेष मंत्रों और लक्ष्मी-कुबेर की ऊर्जा से अभिमंत्रित किया जाता है, तो इसे 'सिद्ध धन आकर्षण स्फटिक माला' कहते हैं। यह माला ब्रह्मांडीय ऊर्जा (Cosmic Energy) को खींचकर धारक के जीवन में आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।
माँ लक्ष्मी: स्फटिक को माँ लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। "शुक्लवर्णं" होने के कारण यह देवी की सात्विकता और ऐश्वर्य का प्रतीक है।
शुक्र ग्रह (Venus): ज्योतिष में इसका सीधा संबंध शुक्र देव से है, जो विलासिता, प्रेम और धन के कारक हैं।
माँ सरस्वती: इसकी निर्मलता के कारण यह ज्ञान और एकाग्रता के लिए देवी सरस्वती से भी जुड़ी है।
बिना सिद्ध की गई माला केवल एक आभूषण है। इसे चैतन्य करने की विधि इस प्रकार है:
शुभ मुहूर्त: शुक्रवार की सुबह या पूर्णिमा की रात को यह कार्य करें।
पंचामृत स्नान: माला को कच्चे दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल के मिश्रण में कुछ समय के लिए रखें।
शुद्धिकरण: फिर इसे साफ जल से धोकर गुलाबी या सफेद रेशमी वस्त्र पर रखें।
मंत्र जाप: माला को हाथ में लेकर माँ लक्ष्मी के बीज मंत्र “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः” का कम से कम 108 बार जाप करें।
धूप-दीप: गुलाब की अगरबत्ती और घी का दीपक जलाकर माला को उसकी लौ के ऊपर से 7 बार घुमाएं।
धन का आगमन: यह दरिद्रता को दूर कर आय के नए और स्थायी स्रोत बनाती है।
मानसिक शांति: स्फटिक की प्रकृति शीतल होती है, इसलिए यह क्रोध को शांत कर तनाव मुक्त जीवन प्रदान करती है।
वास्तु दोष निवारण: यदि इस माला को घर के मंदिर में रखा जाए, तो यह घर की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेती है।
एकाग्रता: विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह निर्णय लेने की क्षमता और एकाग्रता बढ़ाती है।
दिन और समय: शुक्रवार की सुबह स्नान के बाद माँ लक्ष्मी का ध्यान करते हुए इसे धारण करें।
माला के मनके: सिद्ध माला में कम से कम 108+1 (मेरु) मनके होने चाहिए।
धारण करने का स्थान: इसे गले में धारण किया जा सकता है। यदि आप धारण नहीं करना चाहते, तो इसे लाल मखमली कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी या पूजा स्थान पर भी रख सकते हैं।
स्फटिक माला अत्यंत संवेदनशील होती है, इसलिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
गोपनीयता: इसे हमेशा अपने वस्त्रों के अंदर पहनें ताकि यह सीधे आपके हृदय प्रदेश (Heart Center) को स्पर्श करे और बाहरी लोगों की नजर न पड़े।
अशुद्ध अवस्था: सूतक (मृत्यु), पातक (जन्म) या श्मशान घाट जाते समय माला उतार देनी चाहिए।
शारीरिक संबंध: शारीरिक संबंध बनाते समय माला धारण न करें।
साफ-सफाई: महीने में एक बार पूर्णिमा के दिन माला को गंगाजल से धोकर कुछ देर चंद्रमा की रोशनी में रखें |
व्यक्तिगत उपयोग: अपनी पहनी हुई माला कभी किसी दूसरे को न दें और न ही किसी दूसरे की पहनी हुई माला स्वयं पहनें।
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