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भाग्यलक्ष्मी सिद्ध मुद्रा (Bhagyalakshmi Siddha Mudra)
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भाग्यलक्ष्मी सिद्ध मुद्रा (Bhagyalakshmi Siddha Mudra) आध्यात्मिक और आर्थिक उन्नति का एक अत्यंत प्रभावशाली प्रतीक है। इसे 'मुद्रा' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह धन की देवी माँ लक्ष्मी की ऊर्जा को एक विशिष्ट भौतिक रूप (सिक्के या प्रतीक) में बांधकर सिद्ध की गई होती है।


1. परिचय और महिमा (Introduction and Significance)

भाग्यलक्ष्मी सिद्ध मुद्रा कोई साधारण सिक्का नहीं है। यह शास्त्रों में वर्णित 'महालक्ष्मी' के उस स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती है जो "भाग्य" का उदय करती है। इसकी महिमा यह है कि इसे विशेष मुहूर्त (जैसे पुष्य नक्षत्र, अक्षय तृतीया या दीपावली) में श्री सूक्त और कनकधारा स्तोत्र के हजारों पाठों द्वारा चैतन्य किया जाता है। माना जाता है कि जिस स्थान पर यह सिद्ध मुद्रा होती है, वहां से दरिद्रता और दुर्भाग्य सदा के लिए विदा हो जाते हैं।

2. इसके प्रमुख लाभ (Key Benefits)

  • भाग्य का उदय: जो कार्य लंबे समय से अटके हुए हैं, वे अचानक बनने लगते हैं।

  • धन संचय: यह न केवल धन आगमन के रास्ते खोलती है, बल्कि फिजूलखर्ची को रोककर धन को संचित करने में मदद करती है।

  • व्यापारिक सफलता: व्यापारियों के लिए यह ग्राहकों को आकर्षित करने और सौदों में लाभ दिलाने का काम करती है।

  • सकारात्मक आभामंडल: घर के भीतर की नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष के प्रभाव को कम करती है।


3. स्थापना की विधि (Installation Procedure)

इस मुद्रा को स्थापित करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

  1. शुभ समय: इसे शुक्रवार की सुबह या संध्या काल में स्थापित करें।

  2. पवित्रिकरण: सबसे पहले मुद्रा को गंगाजल और कच्चे दूध से स्नान कराएं, फिर शुद्ध जल से धोकर पोंछ लें।

  3. आसन: एक छोटी चौकी पर लाल रेशमी वस्त्र बिछाएं और उस पर मुद्रा को स्थापित करें।

  4. पूजन: मुद्रा पर कुमकुम, अक्षत (बिना टूटे चावल) और इत्र अर्पित करें। कमल या गुलाब का फूल चढ़ाना अत्यंत शुभ है।

  5. भोग: माँ लक्ष्मी को प्रिय सफेद मिठाई या मखाने की खीर का भोग लगाएं।

  6. मंत्र: स्थापना के समय “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं भाग्यलक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।


4. विशेष ध्यान रखने योग्य बातें (Points to Keep in Mind)

  • दिशा: इसे हमेशा अपने घर या दुकान के उत्तर (North) या उत्तर-पूर्व (Ishaan Corner) दिशा में स्थापित करें।

  • दृष्टि: स्थापना ऐसी जगह करें जहाँ यह साफ-सुथरी रहे, लेकिन बाहरी लोगों की सीधी और बुरी नजर इस पर बार-बार न पड़े।

  • अखंड ज्योति: यदि संभव हो, तो स्थापना के दिन घी का एक दीपक अखंड रूप से जलने दें।


5. नियम और सावधानियाँ (Rules and Precautions)

भाग्यलक्ष्मी सिद्ध मुद्रा की दिव्यता बनाए रखने के लिए इन सावधानियों का पालन करें:

  • स्पर्श वर्जित: परिवार के मुख्य सदस्य (साधक) के अलावा अन्य लोग इसे बार-बार न छुएं।

  • शौच-अशुद्धि: सूतक (मृत्यु) या मासिक धर्म के दौरान इसे स्पर्श न करें और न ही इसके पास जाएं।

  • नियमित सेवा: इसे केवल स्थापित करके भूल न जाएं; प्रतिदिन इसके सम्मुख धूप-दीप अवश्य जलाएं।

  • सात्विकता: जिस स्थान पर मुद्रा स्थापित हो, वहां मांस, मदिरा या अभद्र भाषा का प्रयोग बिल्कुल न करें।

  • स्थानांतरण: एक बार स्थापित होने के बाद इसे बार-बार एक जगह से दूसरी जगह न हटाएं।


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