*सिद्ध श्री यंत्र धारण*
सिद्धि समय *लगभग* (15) दिन
यह श्री यंत्र कवच (Shree Yantra Kavach) धन, सुख और सुरक्षा के लिए सबसे शक्तिशाली और पवित्र यंत्रों में से एक है, जिसे महालक्ष्मी का साक्षात् स्वरूप माना जाता है। 15 दिन की तपस्या से सिद्ध होने के कारण इसकी शक्ति असाधारण होती है।
यहाँ इसकी धारण विधि, लाभ और परहेज की विस्तृत जानकारी दी गई है: श्री यंत्र कवच (गोल, चांदी): महालक्ष्मी की असीम कृपा
1. प्रमुख लाभ (Core Benefits)
यह गोल श्री यंत्र ताबीज धारण करने वाले व्यक्ति के जीवन में तीन मुख्य क्षेत्रों में सम्पूर्णता लाता है:
| क्षेत्र | लाभ का विवरण |
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| धन और समृद्धि (Wealth & Prosperity) | माता लक्ष्मी की विशेष कृपा सदैव बनी रहती है। अपरमपर धन की प्राप्ति होती है, आय के नए स्रोत खुलते हैं, और व्यक्ति हर प्रकार के सुख और ऐश्वर्य से परिपूर्ण होता है। |
| मनोकामना एवं पूर्ति (Wish Fulfillment) | इसे धारण करने के बाद जो एक विशेष मनोकामना माँगी जाती है, वह शीघ्र पूर्ण होती है। यह भाग्य को जागृत करता है। |
| सर्वतोमुखी सुरक्षा (Overall Protection) | यह एक सुरक्षा कवच का काम करता है। शरीर, परिवार और घर की बुरी नजर, तंत्र बाधा, और नकारात्मक ऊर्जा से पूर्ण रक्षा होती है। |
| सर्वग्राह्यता | इसे पुरुष, स्त्री, और बच्चे सभी धारण कर सकते हैं। |
2. सिद्धि एवं निर्माण (Consecration and Construction)
* धातु: यह यंत्र शुद्ध चांदी (Silver) का गोलाकार (Round) स्वरूप में बनाया जाता है, जिससे यंत्र की ऊर्जा नियंत्रित रहती है।
* 15 दिवसीय सिद्धि: तांत्रिक इस यंत्र को 15 दिनों की कठिन तपस्या और कठोर ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सिद्ध करता है। इस दौरान निरंतर महालक्ष्मी के विशिष्ट बंगाली मंत्र एवं वैदिक विद्या (जैसे श्री सूक्त या कनकधारा) का जाप किया जाता है।
* धारण स्थान: इसे गले में धारण किया जाता है, जहाँ यह हृदय चक्र (Heart Chakra) के पास रहकर सीधे धन और प्रेम की ऊर्जा को आकर्षित करता है।
3. धारण विधि (Wearing Method)
ताबीज की पूर्ण शक्ति प्राप्त करने के लिए इसे विधिपूर्वक धारण करें:
* शुभ समय: इसे शुक्रवार (जो लक्ष्मी जी का दिन है) या किसी शुभ नक्षत्र (जैसे पुष्य या रवि पुष्य) में धारण करें।
* शुद्धिकरण: ताबीज को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल का मिश्रण) से स्नान कराकर शुद्ध करें।
* पूजा और संकल्प: ताबीज को लाल कपड़े पर रखें। माँ लक्ष्मी के सामने कमल गट्टे की माला या स्फटिक माला से “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का कम से कम एक माला (108 बार) जाप करें।
* धारण: मंत्र जाप के बाद इसे लाल, पीले या सुनहरे धागे/चेन में गले में धारण करें।
4. नियम और परहेज (Rules and Precautions)
चूँकि यह सीधे माता लक्ष्मी से संबंधित है, इसलिए पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है।
* पवित्रता: यंत्र को गंदे हाथों से या अपवित्र अवस्था में न छुएं।
* निष्कासन: शारीरिक संबंध बनाते समय या शमशान घाट/अंतिम संस्कार में जाते समय इस यंत्र को शरीर से अवश्य उतार देना चाहिए और पूजा स्थान पर रख देना चाहिए।
* आहार: शुक्रवार को तामसिक भोजन (मांस-मदिरा) का सेवन पूर्ण रूप से वर्जित रखें।
* सत्य और दान: धन की प्राप्ति के बाद ईमानदारी बनाए रखें और अपनी आय का कुछ हिस्सा दान में अवश्य दें, जिससे लक्ष्मी जी की कृपा अटूट बनी रहे।
यह यंत्र विशेष करके रात्रि में सोने से पहले निकाल देना चाहिए और सुबह स्वयं स्नान करके एवं यंत्र को भी गंगाजल में स्नान करके धारण करना चाहिए किसी भी प्रकार की यात्रा में धारण नहीं करना है मांस मछली अंडे शराब खाने के 3 दिन बाद धारण कर सकते हैं
यह सिद्ध यंत्र जब भी आपको प्राप्त होता है ,,तो आप कहीं भी मंदिर या पवित्र स्थान पर स्थापित करेंगे ,,और शुक्रवार या पुष्य अथवा रवि पुष्य योग का इंतजार करेंगे//
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