रत्नों के दिए गए दाम 6 कैरट के दाम है।
The prices given for the gemstones are for 6 carats.
ज्योतिष शास्त्र में लहसुनिया (Cat's Eye/Chrysoberyl) को 'केतु' (Ketu) ग्रह का रत्न माना गया है। केतु को मोक्ष, अध्यात्म और आकस्मिक घटनाओं का कारक माना जाता है।
लहसुनिया एक अद्भुत रत्न है जिसके अंदर बिल्ली की आंख (Cat's Eye) जैसी एक चमकती हुई रेखा होती है, जिसे 'चैटोयेंसी' (Chatoyancy) कहते हैं। ज्योतिष में यह केतु के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने और उसकी ऊर्जा को संतुलित करने में अत्यंत प्रभावी है।
आकस्मिक लाभ: यह रत्न अचानक धन लाभ और अप्रत्याशित सफलता के योग बनाता है।
अध्यात्म और ध्यान: जो लोग ध्यान, योग या अध्यात्म में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह रत्न बहुत सहायक है।
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा: यह जातक को बुरी नजर, टोने-टोटके और अदृश्य बाधाओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
चमत्कार: यह रत्न राहु-केतु के दुष्प्रभावों और कुंडली में 'सर्प दोष' या 'पितृ दोष' के प्रभाव को कम करने में चमत्कारिक माना जाता है।
लहसुनिया मुख्य रूप से श्रीलंका (सीलोन) में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त यह भारत (उड़ीसा), ब्राजील और अफ्रीकी देशों की खदानों से प्राप्त होता है। यह रत्न चट्टानों के भीतर विशिष्ट खनिजों के दबाव और संरचना से बनता है। इसे खदानों से निकालकर कुशल कारीगरों द्वारा 'कैबोचोन' (Cabochon) आकार में तराशा जाता है ताकि इसके अंदर की 'बिल्ली की आंख' वाली चमक स्पष्ट दिखे।
धातु: लहसुनिया को पंचधातु या चांदी (Silver) की अंगूठी में धारण करना सबसे शुभ होता है।
उंगली: इसे दाएं हाथ की मध्यमा (Middle Finger) में धारण करना चाहिए।
इसे गुरुवार (Thursday) या मंगलवार (Tuesday) के दिन, केतु की होरा में धारण करना सर्वोत्तम माना जाता है।
शुद्धिकरण: अंगूठी को धारण करने से पहले गंगाजल, कच्चे दूध और शहद के मिश्रण में 30 मिनट तक रखें।
सक्रियण: इसे स्वच्छ जल से धोकर साफ करें और भगवान गणेश या केतु देव का ध्यान करें।
मंत्र: "ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
धारण: मंत्र जाप के बाद धूप-दीप दिखाकर इसे मध्यमा उंगली में धारण करें।
कुंडली परामर्श: लहसुनिया बहुत ही शक्तिशाली रत्न है। इसे अपनी कुंडली में केतु की स्थिति की जांच कराए बिना धारण न करें। गलत स्थिति में इसे पहनने से भ्रम और स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
टेस्टिंग पीरियड: इसे धारण करने से पहले कुछ दिनों के लिए अपने पास रखें। यदि आपको कोई बड़ी परेशानी महसूस न हो, तभी इसे उंगली में पहनें।
शुद्धता: यदि रत्न में गहरी दरारें या धब्बे हों, तो उसे बिल्कुल न पहनें।
सात्विक जीवन: रत्न धारण करने के बाद नशा, मांस-मदिरा और अनैतिक कार्यों से बचें ताकि केतु की आध्यात्मिक ऊर्जा का लाभ मिल सके।
सुझाव: केतु का रत्न होने के कारण, लहसुनिया का प्रभाव बहुत सूक्ष्म और गहरा होता है। इसे धारण करने के बाद धैर्य बनाए रखना आवश्यक है।
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सूर्य कान्त द्विवेदी:
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