*सिद्ध वीर्य स्तंभन यंत्र*
सिद्धि समय *लगभग* (7) दिन
यह वीर्य स्तंभन ताबीज तंत्र और आयुर्वेद के सिद्धांतों पर आधारित एक विशेष प्रयोग है, जिसे दाम्पत्य सुख को बढ़ाने के लिए धारण किया जाता है। इसे अक्सर कामदेव शक्ति ताबीज भी कहा जाता है।
यहाँ इसकी विधि, लाभ, और नियमों का विस्तृत वर्णन दिया गया है: कामदेव शक्ति ताबीज (वीर्य स्तंभन): लाभ, विधि और नियम
यह ताबीज विशेष रूप से वीर्य स्तंभन (शारीरिक संबंधों के समय को बढ़ाने) और वैवाहिक जीवन में आनंद और संतुष्टि लाने के लिए बनाया जाता है।
1. प्रमुख लाभ (Benefits)
| लाभ का क्षेत्र | विवरण |
|—|—|
| वीर्य स्तंभन | यह इसका मुख्य लाभ है। ताबीज वीर्य को स्तंभित करने में सहायता करता है, जिससे दंपति जीवन में आनंद की अवधि और गुणवत्ता में वृद्धि होती है। |
| आत्मविश्वास में वृद्धि | पुरुष की शारीरिक क्षमता और प्रदर्शन के संबंध में आत्मविश्वास (Self-Confidence) बढ़ता है। |
| दांपत्य सुख | पति-पत्नी के बीच शारीरिक और मानसिक संतुष्टि में वृद्धि होती है, जिससे रिश्ता मजबूत होता है। |
| ऊर्जा का संतुलन | इसे कमर में धारण करने से शरीर में यौन ऊर्जा (Sexual Energy) का सही संतुलन बना रहता है। |
2. निर्माण एवं सिद्धि (Construction and Consecration)
* धातु: यह शुद्ध चांदी (Silver) में ही बनाया जाता है, क्योंकि चांदी शीतलता और शुद्धता का प्रतीक है।
* भीतरी सामग्री: ताबीज के अंदर भोजपत्र पर विशेष कामदेव यंत्र या हनुमान यंत्र (बल और स्तंभन के लिए) लिखा जाता है। साथ ही सफेद मूसली, अश्वगंधा की जड़ या कौंच बीज जैसी विशिष्ट जड़ी-बूटियाँ (जो स्तंभन में सहायक हों) डाली जाती हैं।
* सिद्धि अनुष्ठान: इस ताबीज को 11 से 12 दिनों तक विशेष कामदेव मंत्र या गुप्त स्तंभन मंत्रों से सिद्ध किया जाता है, जिसके लिए कठोर ब्रह्मचर्य का पालन और विशेष मंत्र जाप आवश्यक होता है।
3. धारण विधि (Wearing Method)
ताबीज की पूर्ण शक्ति प्राप्त करने के लिए इसे सही विधि से धारण करना आवश्यक है।
* शुभ मुहूर्त: इसे शुक्रवार (शुक्र देव, जो प्रेम और वैवाहिक सुख के कारक हैं) या किसी शुभ पुष्य नक्षत्र में धारण करें।
* शुद्धिकरण: ताबीज को कच्चे दूध और गंगाजल से धोकर पवित्र करें।
* पूजा: ताबीज को सामने रखकर संबंधित स्तंभन मंत्र या कामदेव मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें (जैसे- “ॐ कामदेवाय विद्महे रति प्रियाय धीमहि तन्नो अनंग प्रचोदयात्”)।
* धारण: मंत्र जाप के बाद इसे लाल या काले धागे में कमर में बाँधा जाता है। इसे इस तरह बाँधना चाहिए कि यह सीधे त्वचा को स्पर्श करे।
* समय: इसे स्थायी रूप से धारण किया जा सकता है।
4. नियम और परहेज (Rules and Precautions)
* पवित्रता: ताबीज को हमेशा पवित्र और स्वच्छ अवस्था में रखें।
* निष्कासन: शौच, स्नान या किसी भी अपवित्र कार्य के दौरान ताबीज को शरीर से उतारने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन शमशान घाट या किसी भी अशुद्ध स्थान पर जाने से पहले इसे उतार देना चाहिए।
* आचरण: इस ताबीज का उपयोग केवल दांपत्य जीवन के भीतर ही करना चाहिए। इसका प्रयोग अनैतिक संबंधों में करने पर यह अपना प्रभाव खो देता है या विपरीत परिणाम दे सकता है।
* आहार: धारण अवधि (11-12 दिन मतलब धारण करने के बाद 11 से 12 दिन तक) के दौरान तामसिक भोजन (मांस, मदिरा) का पूर्ण परहेज करें। धारण करने के बाद भी सात्विक आहार उत्तम माना जाता है।
यह ताबीज कोरियर के माध्यम से जब भी आपको प्राप्त होता है, तो किसी भी मंदिर या पवित्र स्थान पर स्थापित करें ,,और शुक्रवार को ऊपर बताए गए विधि के अनुसार धारण करें//
विशेष निर्देश _ हमारे केंद्र द्वारा प्रदान की गई मंत्र विद्या, यंत्र विद्या, सिद्ध सामग्री ,एवं आयुर्वेदिक औषधि एवं अन्य किसी भी सामग्री का हम आधिकारिक रूप से कोई भी गारंटी या जिम्मेदारी नहीं लेते,, आप चैनल के विश्वास एवं चमत्कार देखकर के स्वयं या दूसरों के हित के लिए प्रयोग कर सकते हैं ,,धन्यवाद