Sarvaushadhi for Havan & Puja | Sacred Herbal Mix for Yagya, Mandir Pratishtha & Hindu Rituals
सर्वोषधि (Sarvoshadhi) भारतीय पूजा पद्धति, विशेष रूप से अभिषेक और कलश स्थापना में प्रयुक्त होने वाली अत्यंत दिव्य औषधियों का एक समूह है। इसे 'समस्त औषधियों का सार' माना जाता है।
सर्वोषधि का शाब्दिक अर्थ है "सभी औषधियों में श्रेष्ठ"। शास्त्रों में इसे देवताओं का प्रिय और नकारात्मक शक्तियों का नाशक माना गया है। भगवान शिव या अन्य देवताओं के 'महारुद्र अभिषेक' या 'कलश स्थापना' के समय जल में सर्वोषधि मिलाकर अभिषेक करने से उस जल में समस्त तीर्थों और औषधियों की शक्ति समाहित हो जाती है।
सर्वोषधि किसी एक जड़ी-बूटी से नहीं, बल्कि दस विशेष औषधीय वनस्पतियों के मिश्रण से बनती है। ये औषधियाँ हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों या पवित्र वनों में पाई जाती हैं। इसके मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:
मुर्रा (Murra): सुगंध और शीतलता के लिए।
मांसी (Jatamansi): मन की शांति और एकाग्रता के लिए।
वचा (Vacha): बुद्धि वर्धक और वाक-शक्ति के लिए।
कुष्ठ (Kustha): चर्म रोगों और नकारात्मक ऊर्जा के नाशक के रूप में।
हल्दी (Haridra): पवित्रता और सुरक्षा का प्रतीक।
दारुहल्दी (Daruharidra): संक्रमण नाशक।
शैलेय (Shailey): हिमालयी काई, जो औषधीय गुणों से भरपूर होती है।
चोरक (Chorak): सुगंधित वनस्पति।
मुरा (Mura - या अन्य सुगंधित जड़): ऊर्जावान बनाने के लिए।
एला (Cardamom/Elaichi): यह पवित्रता और सात्विकता का प्रतीक है।
इन जड़ी-बूटियों की जड़ों, छाल और बीजों को एक निश्चित अनुपात में सुखाकर और पीसकर एक चूर्ण (पाउडर) के रूप में तैयार किया जाता है।
सर्वोषधि का प्रयोग आध्यात्मिक और भौतिक दोनों दृष्टियों से लाभकारी है:
अभिषेक में महत्व: अभिषेक के जल में सर्वोषधि मिलाने से वह जल 'दिव्य औषधि' बन जाता है। इसे शिवलिंग या मूर्तियों पर अर्पित करने से सभी प्रकार के वास्तु दोष और ग्रह बाधाएं दूर होती हैं।
नकारात्मकता का नाश: इसकी तीव्र और सात्विक सुगंध घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत बाधा या ऊपरी हवाओं को समाप्त करने में सक्षम है।
मानसिक शांति: इसके संपर्क में आने से मन की अशांति दूर होती है और पूजा के समय ध्यान (Meditation) में अधिक गहराई आती है।
आरोग्य प्राप्ति: सर्वोषधि मिश्रित जल से स्नान करना या इसे अपने पास रखना स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना गया है। यह शरीर को ऊर्जावान और रोगाणु मुक्त रखने में सहायक हो सकता है।
समृद्धि और सुरक्षा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, सर्वोषधि के प्रयोग से धन, यश और पारिवारिक सुरक्षा की प्राप्ति होती है। यह घर के सदस्यों को आकस्मिक कष्टों से बचाती है।
सावधानी: सर्वोषधि का उपयोग करते समय अत्यधिक श्रद्धा और शुचिता (पवित्रता) का ध्यान रखना चाहिए। इसे हमेशा किसी अच्छे मंदिर या पूजा सामग्री की दुकान से ही प्राप्त करें, क्योंकि इसकी शुद्धता ही इसके प्रभाव को निर्धारित करती है।
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