Sapt Dhanya Puja Samagri | 7 Sacred Grains Set for Havan, Puja, Yagya & Religious Ceremonies
भारतीय संस्कृति और अनुष्ठानिक परंपराओं में 'सप्तधान्य' का अत्यंत महत्व है। यह न केवल पूजा का एक आवश्यक अंग है, बल्कि पृथ्वी की उर्वरता और हमारे जीवन की समृद्धि का प्रतीक भी है।
सप्तधान्य का अर्थ है "सात प्रकार के धान्य" या अनाज। हमारे धर्मग्रंथों और कृषि परंपराओं में सात विशेष अनाजों को बहुत ही शुभ, सात्विक और ऊर्जावान माना गया है। इनका उपयोग प्रमुख रूप से कलश स्थापना, नवग्रह शांति पूजन, वास्तु पूजन और फसल के दौरान किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।
सप्तधान्य के अंतर्गत निम्नलिखित सात प्रकार के अनाजों का समावेश होता है:
गेहूँ (Wheat): यह सूर्य का प्रतीक है और ऊर्जा प्रदान करता है।
जौ (Barley): यह भगवान विष्णु को प्रिय है और शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
चावल (Rice): यह शीतलता और शांति का प्रतीक है।
चना (Chickpea/Gram): यह स्थिरता और मजबूती का प्रतीक है।
तिल (Sesame Seeds): यह पितृ-तर्पण और नकारात्मकता को दूर करने के लिए अनिवार्य है।
मूंग (Green Gram): यह बुद्धि और बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है।
सांवा या कंगनी (Millet/Foxtail Millet): इसे बहुत ही पवित्र और सात्विक अनाज माना जाता है।
सप्तधान्य का 'निर्माण' कोई कृत्रिम प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सात अनाजों का एक शुद्ध मिश्रण है।
चयन: सबसे पहले इन सात अनाजों को अच्छी गुणवत्ता वाला चुना जाता है।
विधि: पूजा के लिए इन सातों अनाजों को एक निश्चित अनुपात (समान मात्रा) में मिलाकर एक पात्र में रखा जाता है। कलश स्थापना के समय इसे मिट्टी के पात्र (वेदी) में बिछाया जाता है, जिसके ऊपर कलश रखा जाता है।
अंकुरण: नवरात्रि या अन्य शुभ अवसरों पर, सप्तधान्य के ऊपर मिट्टी की परत बिछाकर जल छिड़का जाता है। धीरे-धीरे इन अनाजों से अंकुर फूटते हैं, जिन्हें 'जवारे' कहा जाता है। यह विकास और जीवन की निरंतरता का संकेत है।
सप्तधान्य का उपयोग केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं है, इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और व्यावहारिक लाभ हैं:
अन्नपूर्णा का आशीर्वाद: घर में सप्तधान्य रखने से माता अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश: वास्तु शास्त्र के अनुसार, कलश में सप्तधान्य का प्रयोग करने से स्थान की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और वातावरण सात्विक बनता है।
नवग्रहों की शांति: यह सात प्रकार के अनाज नौ ग्रहों के दोषों को शांत करने और उनके शुभ प्रभाव को बढ़ाने में सहायक होते हैं।
समृद्धि का प्रतीक: यह जीवन में आने वाली प्रगति और समृद्धि का प्रतीक है। अंकुरित होते जवारे यह दर्शाते हैं कि घर में खुशहाली और विकास की वृद्धि हो रही है।
सात्विक आहार: आयुर्वेद और शास्त्रों के अनुसार, ये सातों अनाज अत्यंत पौष्टिक होते हैं, जो शरीर और मन दोनों को शुद्ध रखते हैं।
विशेष बात: यदि आप पूजा के बाद बचे हुए सप्तधान्य को पशु-पक्षियों को खिलाते हैं या बहते जल में प्रवाहित कर देते हैं, तो यह और भी अधिक पुण्यकारी माना जाता है। इसे कभी भी कचरे में नहीं फेंकना चाहिए।
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