यह अनुष्ठान व्यापार में निरंतर उन्नति, आर्थिक स्थिरता और सफलता प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली और फलदायी माना गया है।
मंत्र का शुद्ध उच्चारण इस प्रकार है:
"ॐ श्रों श्रों श्रों परमां सिद्धों श्रों श्रों श्रों औं।"
इस अनुष्ठान की सिद्धि के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करें:
व्रत एवं समय (Vrat and Timing): साधक को प्रदोष के दिन उपवास (व्रत) रखना चाहिए और इस साधना को प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में संपन्न करना चाहिए।
सामग्री (Materials Required): पूजा में 'नागोरी' के पुष्पों और अष्टगंध का मिश्रण तैयार कर उपयोग करें।
जप संख्या (Chant Count): पवित्र और एकाग्र होकर उक्त मंत्र का 1000 बार श्रद्धापूर्वक जप करें।
हवन/आहुति (Havan/Offering): जप पूर्ण करने के उपरांत, उसी मंत्र का उच्चारण करते हुए शुद्ध घी या हवन सामग्री से 108 बार आहुति दें।
अवधि (Duration): इस प्रयोग को लगातार 7 प्रदोष तक नियमित रूप से करने पर व्यापार में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं और व्यवसाय में निश्चित रूप से वृद्धि होती है।
व्यापार में बाधाओं का निवारण (Removal of Business Obstacles): यह अनुष्ठान व्यवसाय में आने वाली सभी तकनीकी और अदृश्य बाधाओं को दूर करता है।
निरंतर उन्नति (Constant Growth): इसके प्रभाव से व्यापार में प्रगति और स्थिरता बनी रहती है।
आर्थिक सफलता (Economic Success): यह साधना व्यापारिक लाभ के नए द्वार खोलती है और आर्थिक समृद्धि प्रदान करती है।
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