शत्रु विनाशकारी गृह उद्देश्य मंत्र साधना
यह एक अत्यंत उग्र और प्रभावशाली विषय है। तंत्र शास्त्र में शत्रुओं से सुरक्षा और बाधा निवारण के लिए कई विधान बताए गए हैं। आपके द्वारा बताए गए विवरण के आधार पर, यहाँ एक व्यवस्थित लेख प्रस्तुत है जिसे साधक सावधानी और पूर्ण निष्ठा के साथ अपना सकते हैं।
शत्रु बाधा निवारण: एक तांत्रिक साधना मार्गदर्शिका
जीवन में कई बार व्यक्ति बिना किसी कारण के शत्रुओं से घिर जाता है। जब शत्रु षड्यंत्र रचकर प्रगति को रोकने लगें, तब आध्यात्मिक ऊर्जा का सहारा लेना उचित माना गया है। नीचे दी गई विधि शत्रु के कुप्रभावों को नष्ट करने और साधक की रक्षा करने के लिए है।
1. साधना की तैयारी और समय
इस साधना को पूर्णतः गोपनीय रखना चाहिए। इसकी सफलता के लिए वातावरण और समय का विशेष महत्व है:
* समय: रात्रि 9:00 बजे के बाद (निशिथ काल के आसपास)।
* वस्त्र व आसन: लाल रंग के वस्त्र धारण करें और लाल ऊनी आसन का प्रयोग करें।
* दिशा: साधक का मुख दक्षिण या पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।
2. दीप प्रज्वलन एवं प्रार्थना
साधना शुरू करने से पहले एक दीपक प्रज्वलित करें। दीपक में सरसों का तेल या तिल का तेल होना चाहिए। दीपक जलाने के बाद हाथ जोड़कर निम्नलिखित मंत्रों से दीपक की स्तुति करें:
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अर्थ: हे दीपक की ज्योति! आप परब्रह्म स्वरूप हैं। आप मेरे पापों का हरण करें और मुझे आरोग्य व सुख-संपत्ति प्रदान करें। मेरे मार्ग में बाधा बने हुए शत्रु का विनाश (नकारात्मकता का अंत) करें, आपको नमस्कार है।
3. मुख्य मंत्र और जाप विधि
दीपक के सामने बैठकर रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार (एक माला) जाप करें:
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* सावधानी: मंत्र के बीच में जहाँ कोष्ठक है, वहाँ अपने उस शत्रु का स्पष्ट नाम लें जिससे आप पीड़ित हैं। इसके साथ आपके शत्रु का फोटो ले लेना है,,जितने दिन आप साधना करना है ,,उतने दिन शत्रु का फोटो उतने हिसाब से ले लेना है,, मतलब 21 दिन की साधना है तो 21 फोटो,, 41 दिन की साधना है तो 41 फोटो,, और उतनी ही आपको कील लेनी है,, मतलब लोहे की कील ले लेनी है,, जो दीवाल में लगाई जाती है,उसके ऊपर जहर लगा लेना है,, चूहा मारने वाला,, इस मंत्र से उस कील को सिद्ध करना है मंत्र पढ़ने के बाद फूंक मार करके,, ये करके शत्रु के फोटो में चुभा देना है ,,और वह फोटो संभव हो तो नित्य श्मशान में फेंक करके आए,, और अगर ना संभव हो तो कहीं इकट्ठा करते जाएं,, एक साथ ही शमशान में फेंक देंगे जब साधना संपन्न हो जाएगी,, घर में भी इकट्ठा कर सकते हैं कोई दिक्कत नहीं है बस कोई छूने वाला ना हो,, साधना में मांस और मदिरा का पूर्ण वर्जित है,,यहां तक की पत्नी संयोग पति संयोग भी वर्जित है,,
* एकाग्रता: जाप के समय शत्रु का चेहरा ध्यान में रखें और यह कल्पना करें कि उसकी शत्रुता की शक्ति क्षीण हो रही है।
4. ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बातें
| नियम | विवरण |
|---|---|
| संकल्प | पहले दिन हाथ में जल लेकर संकल्प लें कि आप यह साधना केवल आत्मरक्षा और अन्याय के विरुद्ध कर रहे हैं। |
| ब्रह्मचर्य | साधना काल के दौरान सात्विक भोजन करें और मानसिक पवित्रता बनाए रखें। |
| नियमितता | इसे कम से कम 21 या 41 दिनों तक निरंतर करने से शीघ्र फल प्राप्त होता है। |
| उद्देश्य | तंत्र का उपयोग किसी निर्दोष को कष्ट देने के लिए कभी न करें, अन्यथा इसका विपरीत प्रभाव (Backfire) स्वयं पर भी हो सकता है। |
निष्कर्ष
यह साधना केवल उन्हीं परिस्थितियों में अनुशंसित है जहाँ शत्रु के कारण आपके प्राण, परिवार या मान-प्रतिष्ठा पर गंभीर संकट हो। श्रद्धा और सही विधि से किया गया जाप साधक के चारों ओर एक सुरक्षा कवच निर्मित करता है और शत्रु के कुत्सित प्रयासों को विफल कर देता है।
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