यह मंत्र विशेष रूप से हिंसक पशुओं, विषैले जीवों और अदृश्य तांत्रिक बाधाओं से स्वयं की रक्षा करने के लिए एक अत्यंत प्रभावी कवच है।
साधना में शब्दों का सही उच्चारण ही ऊर्जा को सक्रिय करता है। मंत्र इस प्रकार है:
"जीब जन्तु दुरह पशु गरुर अन्त बाट। साप सापुने, बाघ भालुक, लाग दन्त कपाट।। कार आज्ञे? बड़पीर बाप नरसंहेर आज्ञे!!"
यह कवच आपको यात्रा या विषम परिस्थितियों में सुरक्षित रखने का कार्य करता है:
प्रयोग विधि / Method of Use: मंत्र का पूरी स्पष्टता और एकाग्रता के साथ 3 बार पाठ करें। पाठ पूर्ण होते ही अपने शरीर पर फूंक (मार्जन) मारें।
सुरक्षा लाभ / Protection Benefits: यह क्रिया साधक को निम्नलिखित से सुरक्षित रखती है:
हिंसक जीव: सांप, बिच्छू, बाघ, भालू आदि।
नकारात्मक शक्तियाँ: भूत, प्रेत, डाकनी, शाकनी।
तंत्र बाधा: किसी भी प्रकार का अभिचार कर्म या गुप्त शत्रुओं का भय।
परोपकार हेतु प्रयोग / Use for Altruism: यदि आप किसी अन्य व्यक्ति या रोगी की रक्षा के लिए यह मंत्र पढ़ रहे हैं, तो मंत्र में 'आमार' (मेरे) शब्द के स्थान पर उस रोगी का नाम लेकर उच्चारण करें।
मंत्र विद्या में सफलता के लिए इन नियमों का पालन अनिवार्य है:
उच्चारण की शुद्धता / Accuracy of Pronunciation: मंत्र की शक्ति उसके ध्वन्यात्मक (phonetic) प्रभाव पर निर्भर करती है। अक्षरों और ध्वनि की शुद्धता ही सफलता की एकमात्र कुंजी है।
एकाग्रता / Concentration: उच्चारण में त्रुटि या लापरवाही से मंत्र निष्प्रभावी हो सकता है। अतः प्रत्येक शब्द का सही और शुद्ध अभ्यास करें।
अनुशासन / Discipline: साधना के समय अपना मन पूरी तरह स्थिर रखें और पूर्ण श्रद्धा के साथ इस कवच का प्रयोग करें।
इस सुरक्षा कवच का प्रयोग आप तब करें जब आपको किसी संदेहास्पद स्थान से गुजरना हो, वन-क्षेत्र में जाना हो, या नकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हो रहा हो। मंत्र को सिद्ध करने के लिए एकांत में बैठकर इसका निरंतर अभ्यास करना श्रेयस्कर होता है।
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