वनमाता की कृपा से साधक अपनी यात्रा को निर्विघ्न और सुरक्षित बना सकता है। यह विधि विशेष रूप से तब उपयोगी है जब आप रात के समय या किसी अनजान स्थान पर यात्रा कर रहे हों।
यात्रा पर निकलते समय आने वाली बाधाओं, नकारात्मक ऊर्जाओं और दुर्घटनाओं के भय को दूर करने के लिए इस विधि का प्रयोग करें:
प्रारंभिक क्रिया / Preliminary Action: घर की मुख्य देहरी को लांघकर बाहर निकलें। मार्ग पर ठीक ढाई (2.5) कदम चलने के बाद कुछ क्षणों के लिए रुक जाएं।
मंत्र पाठ / Mantra Chanting: रुके हुए स्थान पर मन ही मन इस विशेष मंत्र का 7 बार पूर्ण शुद्धता के साथ जप करें।
सुरक्षा क्रिया / Protection Action: मंत्र जप करते हुए अपने बाएं हाथ को अपने शरीर पर ऊपर से नीचे (सिर से पैर तक) फेरें और प्रत्येक बार के अंत में शरीर पर 7 बार फूंक मारें।
लाभ / Benefits: यह प्रयोग मार्ग के सभी ज्ञात-अज्ञात संकटों, भूत-प्रेत बाधाओं और दुर्घटनाओं के भय को समाप्त कर आपकी यात्रा को सुरक्षित बनाता है।
यदि आप किसी विशिष्ट स्थान पर स्वयं को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इस विधि द्वारा एक सुरक्षा कवच का निर्माण कर सकते हैं:
विधि / Method: कोई भी लोहे की वस्तु (जैसे चाकू, त्रिशूल, या लोहे की छड़) लें।
अभिमंत्रण / Consecration (Abhimantran): इस वस्तु पर मंत्र का 7 बार जप करके उसे सिद्ध कर लें।
घेरा बनाना / Creating the Circle: उस सिद्ध वस्तु से अपने चारों ओर एक सुरक्षा रेखा (घेरा) खींच दें।
प्रभाव / Effect: यह अभिमंत्रित घेरा एक ढाल के रूप में कार्य करता है, जिसके भीतर कोई भी नकारात्मक या तामसिक शक्ति प्रवेश करने में असमर्थ रहती है।
किसी भी सुरक्षा प्रयोग की सफलता के लिए साधक का विश्वास, एकाग्रता और मंत्र का शुद्ध उच्चारण अत्यंत आवश्यक है। यह विधि आपकी सुरक्षा को मजबूत करने का एक पारंपरिक माध्यम है।
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