यह प्रयोग किन्हीं दो व्यक्तियों के बीच बढ़ते कुप्रभाव को दूर करने या उनके अलगाव हेतु एक शक्तिशाली तांत्रिक विधि है।
"ओं नमो नारायणाय अमुकस्य अमुकेन सह बच्छेदं कुरु कुरु स्वाहा।"
पूर्व तैयारी (सिद्धीकरण): इस प्रयोग को करने से पूर्व साधक को प्रथम विधि में बताए गए नियमों के अनुसार (शुभ मुहूर्त में 10,000 जप द्वारा) इस मंत्र को पहले से सिद्ध कर लेना अनिवार्य है।
दुर्लभ सामग्री संग्रह: सिंह (शेर) के बाल (लोम) और हाथी (हस्ती) के बाल प्राप्त करें। साथ ही, उन दोनों लक्षित व्यक्तियों के पैरों के नीचे की धूल (मिट्टी) लाकर एक साथ मिला लें।
पोटली निर्माण: इन तीनों सामग्रियों (सिंह के बाल, हाथी के बाल और पैरों की मिट्टी) को मिलाकर एक छोटी सी पोटली बना लें और इसे अपने साधना स्थल पर सुरक्षित रखें।
हवन विधान: साधना स्थल पर पवित्र अग्नि (यज्ञ कुंड) प्रज्वलित करें। उस अग्नि के सम्मुख बैठकर मंत्र का निरंतर उच्चारण करते हुए चमेली के शुद्ध फूलों से 108 बार आहुति दें।
परिणाम: आहुति देते समय मंत्र का शुद्ध उच्चारण जारी रखें। इस शक्तिशाली हवन प्रयोग के पूर्ण होते ही उन दोनों व्यक्तियों के मध्य तीव्र विद्वेषण उत्पन्न होने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है।
साधना काल के दौरान किसी भी प्रकार की शंका, दुविधा, मंत्र-उच्चारण में असमर्थता या विशेष मार्गदर्शन के लिए आप सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच हमारे केंद्र के साधना विशेषज्ञ से सीधे सलाह प्राप्त कर सकते हैं।
परामर्श हेल्पलाइन नंबर: 7668607892
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