यह एक अत्यंत सूक्ष्म और शक्तिशाली तांत्रिक विधान है, जो साधक की देह और उसके सूक्ष्म ऊर्जा क्षेत्र (Aura) को नकारात्मक शक्तियों के लिए पूरी तरह अदृश्य और सुरक्षित बना देता है।
किसी भी आवश्यक कार्य या तांत्रिक साधना के लिए प्रस्थान करते समय निम्नलिखित विधि का पालन करें:
ध्यान / Meditation: पूर्व दिशा की ओर मुख करके अपने इष्टदेव अथवा माँ महाकाली का पूर्ण श्रद्धा से ध्यान करें।
मंत्र पाठ / Mantra Chanting: पूर्ण एकाग्रता और दृढ़ संकल्प के साथ इस मंत्र का 1 बार पाठ करें।
फूत्कार क्रिया / Blowing Action: मंत्र पाठ समाप्त होते ही अपने वक्षस्थल (छाती) पर ऊपर से नीचे की ओर 3 बार गहरी फूंक (फूत्कार) मारें।
लाभ / Benefits: इस दिव्य क्रिया से साधक का संपूर्ण स्थूल शरीर और सूक्ष्म आभामंडल (Aura) पूरी तरह संरक्षित हो जाता है। इसके पश्चात मार्ग में या गंतव्य पर किसी भी प्रकार के भूत, प्रेत, पिशाच या नकारात्मक बाधाओं का प्रभाव साधक पर नहीं पड़ता।
अपने स्थान को सुरक्षित करने हेतु यह प्रयोग करें:
विधि / Method: लोहे की किसी भी वस्तु पर इस मंत्र का 7 बार जप करके उसे सिद्ध (अभिमंत्रित) कर लें।
घेरा / Protection Circle: अभिमंत्रित वस्तु का उपयोग करते हुए अपने चारों ओर एक सुरक्षा रेखा (घेरा) खींच दें।
प्रभाव / Effect: इस अभिमंत्रित घेरे के भीतर कोई भी नकारात्मक अथवा तामसिक शक्ति प्रवेश करने में सक्षम नहीं होगी।
"गलत अभ्यास से बेहतर है सही मार्गदर्शन। साधना पथ पर सुरक्षित और सफल बढ़ें।"
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