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त्रिकालदर्शी लौंग चालान और लहसुन चालान विद्या
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✨ बंगाल की अति प्राचीन और गुप्त विद्या ✨

क्या आप त्रिकालदर्शी लौंग चालान और लहसुन चालान विद्या सीखना चाहते हैं? 🔮

यह भारत की वो दुर्लभ विद्याएँ हैं, जिनमें लौंग और लहसुन स्वयं अपनी जगह खड़े होकर आपके हर प्रश्न का सटीक जवाब देते हैं। चाहे कोई भी समस्या हो, इस मंत्र के माध्यम से आप किसी भी प्रश्न का उत्तर प्राप्त कर सकते हैं।

📜 विशेषताएँ:

✅ बंगाल की अति प्राचीन सिद्ध विद्या।

✅ प्रश्नों के तुरंत और सटीक उत्तर।

💰 सीमित समय के लिए ऑफर:

सामान्यतः इन दोनों सिद्ध मंत्रों की सेवा राशि ₹35,000 है। लेकिन, केवल आज के लिए आप यह दोनों सिद्ध मंत्र केवल ₹9,100 में प्राप्त कर सकते हैं।

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त्रिकालदर्शी लहसुन चालान


# कलुआ वीर मशान साधना एवं लहसुन द्वारा पूछा लगाने की विधि

यह साधना 'कलुआ वीर मशान' को प्रसन्न कर उनके आशीर्वाद से लहसुन के माध्यम से प्रश्नों के उत्तर (पूछा) प्राप्त करने के लिए की जाती है। छात्रों की सुगमता के लिए संपूर्ण पाठ्यक्रम को नीचे चरणों में विभाजित किया गया है।

## 1. मुख्य साधना मंत्र

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*नोट: साधना में सफलता के लिए मंत्र के अक्षरों और उच्चारण की शुद्धता अनिवार्य है।*

## 2. साधना काल एवं प्रारंभिक तैयारी

* साधना स्थल: यह साधना अनिवार्य रूप से श्मशान घाट में जाकर संपन्न करनी होगी।

* साधना अवधि: यह कुल 11 दिन की अत्यंत कड़े नियमों वाली साधना है।

* दैनिक भोग सामग्री: साधना के दौरान प्रतिदिन कलुआ वीर को निम्नलिखित वस्तुओं का भोग अर्पित करना अनिवार्य है:

* मछली का भोग

* 5 बूंदी के लड्डू

* मदिरा (शराब) का भोग एवं धार देना

## 3. दैनिक हवन विधि एवं सामग्री

साधना के प्रत्येक दिन आपको अनिवार्य रूप से 108 बार मुख्य मंत्र का जाप करते हुए आहुति (हवन) देनी है।

### हवन सामग्री मिश्रण:

हवन तैयार करने के लिए नीचे दी गई सामग्रियों को आपस में अच्छी तरह मिलाकर (मिस करके) गाय के घी के साथ उपयोग करें:

* लौंग और इलायची

* इंद्रजौ

* काले तिल और काली मिर्च

* सूखे नारियल के छोटे-छोटे टुकड़े

* गूगल धूप और दशांश धूप

* गाय का शुद्ध घी

## 4. लहसुन को अभिमंत्रित करने एवं चलाने की प्रयोग विधि

जब 11 दिन की साधना के दौरान कलुआ वीर प्रत्यक्ष प्रकट होकर आपको आशीर्वाद प्रदान कर दें (क्योंकि बिना उनकी दिव्य शक्ति के यह प्रयोग कार्य नहीं करेगा), तब आप प्रश्न पूछने के लिए इस विधि का पालन करें:

1. सामग्री: 2 या 4 पीस लहसुन, 4 कनेर के पत्ते, थोड़े से चावल, कुमकुम, 1 या 3 फूल और 5 अगरबत्ती।

2. पत्तियों की तैयारी: चारों कनेर के पत्तों के ऊपर थोड़ा-सा चावल और कुमकुम रखें, फिर उन पर 1 या 3 फूल अर्पित करें।

3. अभिमंत्रण: लहसुन को हाथ में लेकर मुख्य मंत्र द्वारा 21 बार अभिमंत्रित करें (फूंक मारें)।

4. दिशा स्थापना: अभिमंत्रित लहसुन को चारों कनेर के पत्तों के अंदर की तरफ, चारों दिशाओं में स्थापित कर दें।

5. आवाहन: वहां पर 5 अगरबत्ती जलाएं और कलुआ वीर मशान का पुनः स्मरण करते हुए कहें— *"हे कलुआ वीर मशान! आप इस लहसुन में विराजमान हो जाइए।"*

6. पूछा (प्रश्न पूछना): इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद आप कलुआ वीर से अपने सवाल पूछ सकते हैं, वे लहसुन के माध्यम से आपको उत्तर प्रदान करेंगे। ध्यान यह रहे की साधना का और मंत्र का प्रयोग करने से पहले शरीर सुरक्षा मंत्र का प्रयोग अवश्य करेंगे

## 5. शंका समाधान एवं परामर्श केंद्र

साधना काल के दौरान किसी भी प्रकार की त्रुटि, मानसिक शंका, भय या मार्गदर्शन की आवश्यकता होने पर छात्र घबराएं नहीं। उचित मार्गदर्शन और सहायता के लिए हमारे केंद्र के साधना विशेषज्ञ हमेशा उपलब्ध हैं।

* परामर्श समय: सुबह 10:00 AM से शाम 06:00 PM तक

* विशेषज्ञ हेल्पलाइन नंबर: 7668607892

> महत्वपूर्ण चेतावनी: तंत्र साधनाएं अत्यंत संवेदनशील होती हैं। मंत्रों के गलत उच्चारण या नियमों में अनजाने में की गई गलतियों से साधना असफल हो सकती है, इसलिए किसी भी संशय की स्थिति में ऊपर दिए गए नंबर पर सलाह अवश्य प्राप्त करें।




त्रिकालदर्शी लौंग चालान विधान



👉 सबसे पहले आपको 5 लॉन्ग लेना है/और एक मुट्ठी चावल लेना है/लाल कपड़ा नया लेना है पवित्र रहना चाहिए/उसके बाद अपने शरीर का बंधन करके/जो पांच लॉन्ग हैं उन पर 21/21 बार अलग-अलग लॉन्ग को सिद्ध करना है/मतलब हर लॉन्ग के ऊपर 21 बार फूंक मार कर सिद्ध करना है/और जो एक मुट्ठी चावल है उसको भी 21 बार फूंक मार कर सिद्ध कर लेना है/और लाल कपड़े के बीच में रखना है/लाल कपड़ा बिछाने से पहले जमीन पर पवित्रता कर लें/ अथवा किसी लकड़ी के चौकी पर कर रहे हैं तो उसको भी गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर ले/उसके बाद चावल बीच में रखना है/पांच जो सिद्ध लौंग हैं/उसमें से चार लॉन्ग चार दिशा में रखना है/और एक लांग सिद्ध चावल के ऊपर रखना है/उसके बाद गणेश जी माता काली काल भैरव जी/सबकी प्रार्थना करते हुए/आपको लॉन्ग से पूछा लगाना है/किसी मरीज के ऊपर रोग लगा है या नहीं /अगर लगा है तो कृपया अपने स्थान से उठकर जवाब दें/जब आप ऐसा प्रश्न करेंगे /तो अगर वाकई में रोग लगा होगा तो /लोग अपने स्थान से उठकर जवाब देगा/ध्यान यह भी देना है प्रश्न पूछ कर इंतजार करना है /और आरंभ के जो साधक हैं/ वह बार-बार इस प्रश्न को पूछेंगे अपने आंखों को ध्यान को लॉन्ग की तरफ केंद्रित भी करेंगे/ इस प्रकार से तंत्र-मंत्र भूत प्रेत पिशाच सभी के विषय में हां या ना में आप उत्तर प्राप्त कर सकते हैं/चोरी गई वस्तु आदि के विषय में भी/तथा हमारे किसी काम में सफलता मिलेगी या नहीं ऐसे बहुत सारे प्रश्न है /जिनके आप उत्तर हां या ना में प्राप्त कर सकते हैं/यह बहुत बड़ी विद्या है बहुत बड़ी शक्ति है/ जो आपके जीवन में तमाम प्रकार की दुविधाएं उलझन को खत्म करके आपको एक सफल सिद्ध व्यक्तित्व प्रदान करेगी/इसलिए ज्यादा से ज्यादा सदुपयोग में ही इस विद्या का प्रयोग करें/ आप लोगों का भला होगा

त्रिकालदर्शी लौंग साधना विधान



🔴 अनिवार्य सामग्री एकबार

काला कंबल 1

काला वस्त्र 1

एक कटोरी स्टील 1

काला फेटा वस्त्र 1

लौंग 100 ग्राम

🔴 अनिवार्य सामग्री नित्य

पांच प्रकार की मिठाई 1 सेट

अगरबत्ती02 बडा पैकेट

पान रोज

लौंग रोज

इलायची

सुपारी

बताशा 500/ ग्राम

गाय का घी 1 किलो

तिल तेल 2 लीटर

मिट्टी का दीपक बड़ा 1

रूई बत्ती लम्बी 30




👉 विधि

🔺 यह साधना करने से पूर्व जैसा कि पहले ही आपको बताया गया है 🟣कि आप लोगों को अपने शरीर की ऊर्जा बढा लेनी है

🟢 शरीर में छुपे हुए तंत्र को निकाल देना है

🔸यह सब विधान प्रक्रिया पहले ही बताया जा चुका है


🔺 उसके बाद किसी भी महीने के कृष्ण पक्ष के 14वीं तिथि

🟪 जिसे चौदस भी बोला जाता है संस्कृत में उसको कृष्ण चतुर्दशी कहते हैं


🔸 इसी दिन से आपको साधना आरंभ करनी है



👉 नियम एवं परहेज


🔸 साधना को करने वाला व्यक्ति मांस मदिरा का भक्षण नहीं करेगा,/ एकांत कमरे में साधना करनी है उस कमरे में कोई आना-जाना नहीं चाहिए, /आप यह साधना कर रहे हैं इसकी जानकारी किसी और को नहीं होनी चाहिए, /सुविधा के लिए किसी एकांत मंदिर में या एकांत वातावरण में जाकर के भी साधना कर सकते हैं,/ लेकिन किस उद्देश्य से यह साधना आप कर रहे हैं इसकी जानकारी किसी को नहीं होनी चाहिए,

🟢 परिवार के पूछने पर सुख शांति के लिए पूजा कर रहे हैं ऐसा आपको बोलना है


🟢 एक बात और ध्यान रहे कि यह साधना करने से पहले यह सोच समझ लेना है /कि आपके घर में कहीं कोई बालक जन्म लेने वाला तो नहीं है

🔴अथवा आपके घर में कोई मरणासन्न तो नहीं है /मतलब कोई मृत अवस्था में तो नहीं है / कि ऐसा लगता हो कि कुछ दिन बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी


🔴 कुछ दिन बाद होने वाला जन्म एवं कुछ दिन बाद होने वाला मरण इन दोनों ही समय में साधन नहीं करनी चाहिए /जब यह स्पष्ट हो जाए कि ऐसा कोई संदेश अपने परिवार में नहीं है/ तब यह साधना करनी चाहिए



🟢 साधना करने के मध्य में अगर कोई आपके कुल गोत्र में मृत्यु को प्राप्त होता है /अथवा किसी बालक का जन्म होता है तो फिर किसी भी प्रकार की साधना खंडित हो जाती है


👉 साधना तपस्या बड़ा ही पवित्र विषय है, साधना की यह बारीक जानकारियां कोई बताता नहीं है इसलिए समझ में बहुत से साधक असफल है


🔺 जिस एकांत कमरे में या मंदिर में आप साधना करेंगे /वहां पर कोशिश करें कि कमरे में ज्यादा सामग्री ना हो /क्योंकि जब शक्तियां आएंगे तो कमरे में अगर ज्यादा सामग्री होगी तो /शोर भी ज्यादा होगा/ उठने गिरने की आवाज़ आएंगे जिसके कारण आपको डर लग सकता है


🔴 माता काली की यह साधना है इसलिए माता काली के आने से पहले उनके गण आएंगे इसलिए यह हरकत आपके कमरे में हो सकती है


🔺 इन्हीं कुछ कारणों से आपको अपने पारिवारिक घर में साधना करने के लिए मना किया जाता है


🟢 साधना जिस कमरे में आप करेंगे इस स्थल पर आपको सोना भी है क्योंकि वहां की जो एनर्जी है ऊर्जा है वह अगर आप वहां पर शयन नहीं करेंगे तो कुछ बुरी आत्माएं उस ऊर्जा शक्ति को चुरा कर ले जाती हैं/ जिससे ऊर्जा एकत्रित न हो पाने के कारण साधना असफल होती है /यह सब बातें इसलिए बताई जा रही हैं तप की आप लोगों का भविष्य उज्जवल हो




🔺 इस साधना को करने से पहले आप अपने गांव अथवा मोहल्ले से बाहर/ तेरस के दिन संस्कृत में जिसको कृष्ण त्रयोदशी बोला जाता है /उस दिन जाकर ग्राम देवता स्थान देवता से अनुमति लेकर आएंगे कि हम यह साधना करने जा रहे हैं इसमें सफलता प्राप्त हो/ अनुमति लेने से पहले आप ग्राम देवता स्थान देवता के नाम से धूप दीप करेंगे और कुछ मिष्ठान भी चढ़ा देंगे/

🟨 इतनी प्रक्रिया करने के बाद/ चतुर्दशी के प्रातः काल सूर्योदय होने से पहले अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ही तरफ पांच , पांच अगरबत्ती प्रज्वलित करेंगे/अपने पितरों से प्रार्थना करेंगे /कि हम यह साधना करने जा रहे हैं हमें सफलता प्रदान करें


🔴 यह माता काली की साधना है इसलिए संपूर्ण वस्त्र कंबल सब कुछ काला ही रहेगा



🔶 आपको रात्रि 10:00 बजे से साधना के लिए तत्पर हो जाना है साधना 11:00 बजे रात्रि से आरंभ करना है/साधना में आपको काले रंग का ही वस्त्र धारण करना है कल ही वस्त्र से पूरा सर फेटा मार कर ढक लेना है/ जैसे अघोरी लोग सिर ढके रहते हैं वैसे ही/उसके बाद कल कंबल को चार फोल्ड करना है/ उसके बीच में कुश का मोटा आसान भी दबा देना है/ और इस आसन के बीच में नीम की पत्तियां भी बिछा देनी है




🟢 फिर एक लकड़ी के छोटी चौकी के ऊपर/ एक बड़ी सी सुपारी लेकर काले रंग के चावल के ऊपर स्थापित करना है /यह काला चावल काले रंग से बना लेना है/ उस सुपारी को माता काली जी का स्वरूप मानना है

🔵 उसके बाद थोड़ी दूर पर इस चौकी के ऊपर ही पीले चावल के ऊपर एक सुपारी रखना है उनको गणेश जी का स्वरूप मानना है🔴 नित्य ही गणेश जी का पूजन पहले होगा /और उससे भी पहले साधना में अखंड रूप से प्रचलित रहने वाला तिल के तेल का दीपक होना चाहिए/और उसके बाद मानसिक रूप से स्थान देवता वास्तु देवता ग्राम देवता क्षेत्रपाल देवता पितृ देवता के नाम से पांच अगरबत्ती जलाकर रख देना है/ और फिर गणेश जी का पूजन करना है उनको धूप दीप दर्शन करना है/ पांच प्रकार की मिठाई और पीने के लिए जल किसी पात्र में रख दें /और उनसे से प्रार्थना करें की है गणेश जी हमें इस साधना में सफल होने का आशीर्वाद प्रदान करें



🔵 फिर सबसे अंतिम में माता काली का पूजन करेंगे /उनको भी वस्त्र चढ़ाएंगे /धूप दीप अर्पित करेंगे/ पांच प्रकार की मिठाई चढ़ाएंगे /एक पान के ऊपर दो लॉन्ग दो इलायची एक सुपारी रखकर अर्पित करेंगे/ एक बताशा के ऊपर दो लॉन्ग दो इलायची रखकर अर्पित करेंगे /और एक नींबू की बलि भी चाकू से कटकर देंगे उनके सामने/ इसके बाद माता से प्रार्थना करेंगे की है माता हमें इस साधना में सफलता प्रदान करें

🟩 इसके बाद माता काली के सामने ही एक कटोरी में पांच लॉन्ग रखकर यह साधना आरंभ करनी है ध्यान रहे माता काली का स्थान/ गणेश जी का स्थान/ और पांचो लॉन्ग का स्थान पूरी साधना तक बदलना नहीं चाहिए/



🔴 यह पूजन करने के बाद प्रार्थना करने के बाद आप एकांत शुद्ध मन से /पवित्र विचारधारा से अपने गुरु को स्मरण करें/

और रुद्राक्ष की माला से गणेश जी के मंत्र का जाप करें जो आपको पहले बताया जा चुका है


🟡 उसके बाद आपको जो मंत्र बताया गया है/उस मंत्र का पांच माला जाप करना है और एक माला से हवन करना है गाय के घी से


🟡 यह क्रिया लगातार 21 दिन तक करनी है


🟡 इस साधना में आपको कुछ अनुभव भी होंगे /जो कि आप हमारे अलावा और किसी से बताएंगे नहीं


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