यह धूल-अभिमंत्रित करने का एक विशेष तांत्रिक रक्षा विधान है। भगवान शिव की शक्ति से प्रेरित यह प्रयोग मार्ग में आने वाली समस्त नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी नजर और अदृश्य बाधाओं को शांत कर साधक को अभेद्य सुरक्षा प्रदान करता है।
इस दिव्य सुरक्षा कवच को सक्रिय करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करें:
नियम व प्रक्रिया / Rules and Procedure: अपने घर की मुख्य चौखट से बाहर कदम रखने के तुरंत बाद, वहीं रास्ते (मार्ग) से 1 मुट्ठी पवित्र धूल (धूला) अपने दाहिने हाथ में उठा लें।
मंत्र पाठ / Mantra Chanting: उस धूल को अपनी हथेली में सुरक्षित रखते हुए, पूर्ण एकाग्रता के साथ इस महामंत्र का अत्यंत स्पष्ट रूप से 7 बार पाठ करें।
फूंक मारने का विधान / Blowing Ritual: मंत्र का 7 बार पाठ पूर्ण होते ही, अपनी हथेली में रखी हुई उसी धूल पर मुख से 3 बार फूंक मारकर उसे अभिमंत्रित करें।
धूल का प्रयोग / Application of Dust: फूंक मारने के पश्चात उस शक्ति-युक्त अभिमंत्रित धूल को अपने स्वयं के सिर और शरीर पर आदरपूर्वक छिड़क लें (लगा लें)।
अपने साधना स्थल या निवास को नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रखने के लिए यह प्रयोग करें:
विधि / Method: किसी भी लोहे की वस्तु पर इस मंत्र का 7 बार जप करके उसे सिद्ध (अभिमंत्रित) कर लें।
घेरा खींचना / Drawing the Circle: उस अभिमंत्रित वस्तु का उपयोग करते हुए अपने चारों ओर एक सुरक्षा रेखा (घेरा) खींच दें।
प्रभाव / Effect: इस अभिमंत्रित घेरे के भीतर कोई भी नकारात्मक अथवा तामसिक शक्ति प्रवेश करने में पूर्णतः असमर्थ होगी।
अदृश्य बाधाओं का नाश: यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा या टोने-टोटके का असर नहीं होता।
सुरक्षा चक्र: यह मंत्र साधक के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा आवरण बना देता है, जिससे बुरी नजर या पिशाच बाधा का भय समाप्त हो जाता है।
आत्मविश्वास में वृद्धि: इस प्रयोग के बाद साधक निर्भय होकर अपने कार्य की ओर प्रवृत्त होता है, जिससे उसे हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।
त्वरित बचाव: यह साधना अत्यंत सरल है, फिर भी अत्यंत तीक्ष्ण और त्वरित परिणाम देने वाली है।
साधक हेतु विशेष निर्देश: "साधना का पथ श्रद्धा और सटीकता का मार्ग है। अपनी ऊर्जा को सदैव सकारात्मक बनाए रखें।"
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