शनि देव महासाधना: न्याय, अनुशासन और शांति का अनुष्ठान
शनि देव को ज्योतिष शास्त्र में न्याय का देवता और कर्मों का फल देने वाला माना गया है। जीवन में अनुशासन, स्थिरता, धैर्य और पूर्व कर्मों के दोषों से मुक्ति के लिए शनि देव की साधना सबसे प्रभावशाली मानी जाती है।
| विवरण | विवरणात्मक जानकारी |
| कुल जाप संख्या | 23,000 मंत्र (कलियुग विधान के अनुसार 92,000 जाप) |
| जाप का समय | केवल संध्याकाल या रात्रि के समय |
| वस्त्र एवं आसन | काले या गहरे नीले वस्त्र और कंबल का आसन |
| माला | रुद्राक्ष या काले अकीक की माला |
साधना के दौरान इन मंत्रों का पाठ करें:
ध्यान मंत्र: ओँ सौरिः कृष्णतनू रुधिरनेत्रः कृशगात्रः सूर्यपुत्रो गदापाणिः। दक्षाभयप्रदकरो बरदश्च मन्दः सदा भवतु मे सुखदो बिधाता।।
पूजा मंत्र: ओँ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः।
प्रणाम मंत्र: नीलाञ्जनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
दिशा: साधना हेतु पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें और मौन रहकर जाप करें।
विशेष पूजन विधि: शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे या शनि यंत्र के समक्ष सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। दीपक में काले तिल अवश्य डालें।
जाप संकल्प: कलियुग में पूर्ण लाभ हेतु 92,000 मंत्रों का जाप अनुशंसित है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार इसे प्रतिदिन निर्धारित मालाओं में विभाजित करें।
उच्चारण: बंगाली ध्वनि लहजे के अनुसार 'व' को 'ब' और 'श/ष' को 'श' उच्चारित करें।
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