शुक्र देव वैभव, ऐश्वर्य, कला, प्रेम और भौतिक सुख-सुविधाओं के कारक हैं। इनकी साधना दांपत्य जीवन में मधुरता, सुख-समृद्धि और रचनात्मक सफलता के लिए अत्यंत प्रभावशाली है।
ध्यान मंत्र (Dhyana Mantra):
"ओँ श्वेताम्बरधरः श्वेताश्वयुक्तः श्वेताङ्गरागो दक्षाभयप्रदकरः। बरदश्च दैत्यगुरुः शुभ्रः सुरूपः सदा भवतु मे तुष्टये।।"
पूजा मंत्र (Puja Mantra):
"ओँ ह्रीं श्रीं शुक्राय नमः।"
प्रणाम मंत्र (Pranama Mantra):
"हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्। सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्।।"
जाप संख्या (Chanting Count): कुल 16,000 (सोलह हजार) मंत्र जाप। कलियुग के विधान के अनुसार 64,000 मंत्र जाप का लक्ष्य रखें।
समय (Timing): प्रातःकाल या सूर्यास्त के तुरंत बाद (गोधूलि बेला)।
वस्त्र एवं आसन का रंग (Dress & Asana Color): चमकदार सफेद, रेशमी या क्रीम रंग के वस्त्रों का उपयोग करें।
जाप की माला (Chanting Beads): स्फटिक (Crystal) की माला या सफेद चंदन की माला।
विशेष क्रिया (Special Ritual): पूजा स्थान पर इत्र या सुगंधित धूप का प्रयोग अवश्य करें और सफेद चावल की खीर का भोग अर्पित करें।
भौतिक सुख, कलात्मक सफलता और दांपत्य जीवन में मधुरता के विशेष उपायों की अधिक जानकारी के लिए, या इस विधि-विधान को और बेहतर ढंग से समझने के लिए हमारे केंद्र के ज्योतिषाचार्य से वार्ता करें।
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