पारंपरिक तंत्र शास्त्र के 'वृहत् कामाख्या मन्त्रसार' ग्रंथ से लिया गया यह शाबर मंत्र अपनी सरल भाषा और तीव्र प्रभाव के लिए जाना जाता है।
"ॐ नमो आदेश गुरु को। सन्दूर कि मया सन्दूर, नाम तेरी पत्ती। कामाख्या शखर पर तेरी उत्पत्ती। सन्दूर पढ़ 'अमुकी' लगावे वन्दी। हो वश 'अमुक' होके नबुद्धी। ॐ महादेव की शिक्त, गुरु की भिक्त, कामरूप कामाख्या माई की दुहाई। आदेश हाड़ीदासी चण्डी की। 'अमुक' मन लाव नकार न तो पता महादेव वाम पाद जाय लगे।"
छात्रों के शोध और अध्ययन हेतु इसके मुख्य प्रयोग निम्नलिखित हैं:
प्रथम विधि (सिंदूर/बंदी प्रयोग): जो स्त्री अपने पति को अनुकूल या आसक्त करना चाहती है, वह 'कि मया सिंदूर' को हाथ में लेकर इस मंत्र का तीन से चार बार जाप करे। मंत्र पढ़ने के बाद उस सिंदूर से अपने माथे पर बिंदी (बंदी) लगाए। (नोट: मंत्र में जहाँ 'अमुक' या 'अमुकी' शब्द है, वहाँ संबंधित व्यक्ति का नाम लें।)
द्वितीय विधि (तैल एवं पुष्प प्रयोग): सरसों के तेल में 'मालती' के फूलों को डालकर उसका अर्क तैयार कर लें। रति (संभोग) के समय इसे शरीर पर लगाने से साथी के मन में आकर्षण एवं वशीकरण की भावना प्रबल होती है।
कि मया सिंदूर: कामाख्या पीठ से प्राप्त विशेष प्राकृतिक सिंदूर, जिसे तंत्र साधना में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
कामाख्या शिखर: असम का नीलांचल पर्वत, जो तंत्र विद्या का सर्वोच्च केंद्र है।
दुहाई: मंत्र को बाध्यकारी बनाने के लिए उच्च शक्तियों (महादेव या कामाख्या माई) की सौगंध लेना।
वाम पाद: बायाँ पैर। यह मंत्र के अंत में तांत्रिक संकल्प और दृढ़ता का प्रतीक है।
विशेष परामर्श: शाबर मंत्रों का प्रयोग सदैव मर्यादा, प्रेम और वैवाहिक जीवन की शुचिता को ध्यान में रखते हुए ही किया जाना चाहिए। किसी भी अनुचित प्रयोग से साधना की शक्ति खंडित हो सकती है।
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