यहाँ 'सूर्य ग्रह महासाधना' का व्यवस्थित विवरण दिया गया है, जिसे आपने अपनी मार्गदर्शिका के लिए तैयार किया है:
सूर्य देव नवग्रहों के राजा हैं। उनकी साधना मान-सम्मान, स्वास्थ्य और आत्मिक तेज की वृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी है।
आसन (Asana): सभी ग्रहों की साधना के लिए कुशा या ऊन के आसन का प्रयोग करें।
दिशा (Direction): सामान्यतः पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
उच्चारण (Pronunciation): बंगाली ध्वनि लहजे के अनुसार 'व' को 'ब' और 'श/ष' को 'श' के रूप में उच्चारित करें।
ध्यान मंत्र (Dhyana Mantra):
"ओँ रक्ताम्बुजसनमशेषगुणेक सन्धु ं भानु ं समस्तजगतम धपं भजा म। पद्मद्वयाभयबरं दधतं कराब्जैमाणक्यमौ लमरुणाङ्गरु चं त्रनेत्रम्।।"
पूजा मंत्र (Puja Mantra):
"ओँ ह्रीं ह्रीं सूयाय नमः।"
प्रणाम मंत्र (Pranama Mantra):
"जबकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महाद्यु तम्। ध्वान्ता रं सवपापघ्नं प्रणतोऽिस्म दवाकरम्।।"
जाप संख्या (Chanting Count): कुल 7,000 (सात हजार) मंत्र जाप। कलियुग में इसके चार गुना अर्थात 28,000 मंत्र जाप का विधान है, जिसे प्रतिदिन 1, 3 या 5 माला के अनुसार पूर्ण करें।
समय (Timing): प्रातःकाल (सूर्योदय के समय)।
वस्त्र एवं आसन का रंग (Dress & Asana Color): लाल या केसरिया रंग के वस्त्रों का उपयोग करें।
जाप की माला (Chanting Beads): माणिक्य (Ruby) या लाल चंदन की माला।
विशेष क्रिया (Special Ritual): तांबे के पात्र में जल, लाल फूल और कुंकुम मिलाकर सूर्य देव को 'अर्घ्य' देने के उपरांत ही जाप का अनुष्ठान शुरू करें।
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