यह एक अत्यंत प्रभावशाली शास्त्रीय प्रयोग है, जिसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति, उच्च अधिकारी, विरोधी अथवा अदृश्य शक्तियों के तीव्र क्रोध को तत्काल शांत कर वातावरण को अनुकूल और सौहार्दपूर्ण बनाना है।
शुद्ध उच्चारण के साथ इस मंत्र का जप करें:
"ॐ शान्ते प्रशान्ते सर्वक्रोधोपशमनि स्वाहा।"
इस मंत्र की सिद्धि और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करना अनिवार्य है:
जप संख्या (Chant Count): पूर्णतः एकाग्रचित्त होकर स्पष्ट स्वर में मंत्र का 21 बार जप करें।
माला का चयन (Choice of Mala): जप के लिए रुद्राक्ष या चंदन की माला का प्रयोग करना अत्यंत शुभ और प्रभावी माना जाता है।
मुख मार्जन की प्रक्रिया (Process of Mukh Marjan): 21 बार जप पूर्ण करने के उपरांत, एक शुद्ध पात्र में जल लें। इस अभिमंत्रित जल को अपनी दाहिने हाथ की हथेली में लेकर अपने मुख का मार्जन करें (जल से मुख धोएं अथवा जल की बूंदों से मुख को स्पर्श करें)। यह प्रक्रिया मंत्र की ऊर्जा को साधक के व्यक्तित्व में समाहित करती है।
इस शास्त्रीय साधना को विधिपूर्वक संपन्न करने से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:
तत्काल क्रोध शमन (Instant Pacification of Anger): यदि कोई शत्रु, अधिकारी, राजा, देवता या सेवक अत्यंत क्रोध की स्थिति में हो, तो इस प्रयोग से उसका क्रोध क्षण भर में शांत हो जाता है।
सौहार्दपूर्ण वातावरण (Harmonious Environment): क्रोधी व्यक्ति का हृदय साधक के प्रति सौम्य और दयालु हो जाता है।
अनुकूल परिस्थिति (Favorable Circumstances): यह साधना आस-पास के वातावरण में शांति और सामंजस्य स्थापित करती है, जिससे जटिल से जटिल परिस्थितियाँ भी साधक के अनुकूल होने लगती हैं।
यह प्रयोग पूर्ण विश्वास और श्रद्धा के साथ करने पर निश्चित रूप से फलदायी सिद्ध होता है।
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