यह साधना समस्त मनोकामनाओं की सिद्धि और कष्टों के निवारण हेतु अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है।
नित्य जप के लिए मंत्र:
"ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं सिंहेश्वरी ज्वालामुखी जृंभिणी स्तंभनी मोहनी वशीकरणी परधनमोहनी सर्वारिष्टनिवारिणी शत्रुगणसंहारिणी सुबुद्धि दायिनी ॐ आं क्रों ह्रां त्राहि-त्राहि अक्षोभय अक्षोभय अमुकं मे वश्यं कुरू कुरू स्वाहा"
जप संख्या (Chant Count): इस मंत्र का पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ नित्य 108 बार जप करना अनिवार्य है।
फलश्रुति (Benefits): नियमित रूप से 108 बार जप करने से साधक की सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मंत्र में वर्णित देवी के विभिन्न स्वरूपों के अनुसार इसके अलौकिक लाभ इस प्रकार हैं:
सर्वारिष्ट निवारण (Removal of All Obstacles): यह सभी प्रकार के संकटों और बाधाओं का निवारण करती है।
शत्रु विजय (Victory Over Enemies): यह शत्रु वर्ग के संहार और उनसे रक्षा में सहायक है।
सुबुद्धि प्राप्ति (Gaining Wisdom): यह साधक को श्रेष्ठ बुद्धि और विवेक प्रदान करती है।
वशीकरण और आकर्षण (Attraction and Influence): मंत्र में उल्लेखित 'मोहनी' और 'वशीकरणी' गुणों के कारण यह सकारात्मक प्रभाव और आकर्षण शक्ति बढ़ाने में समर्थ है।
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