यह विवरण प्राचीन भारतीय तंत्र विज्ञान के अंतर्गत आने वाले बीजाक्षरात्मक प्रयोगों से संबंधित है। पारंपरिक मान्यताओं में इस मंत्र का उपयोग गर्भवती महिलाओं के सुखद और कष्टरहित प्रसव (Delivery) के लिए किया जाता है।
"ऐं हं हां हूं हैं हौं हः।"
छात्रों के अध्ययन हेतु इस प्रयोग की प्रक्रिया निम्नलिखित है:
आवश्यक सामग्री: भोजपत्र (प्राचीन वृक्ष की छाल) और केसर की स्याही।
लेखन प्रक्रिया: सर्वप्रथम केसर को गुलाब जल या शुद्ध जल में घोलकर स्याही तैयार करें। अनार की कलम या किसी पवित्र लकड़ी की लेखनी से भोजपत्र पर उक्त बीजाक्षर मंत्र को अंकित करें।
दर्शन कराना: मंत्र लिखने के बाद, इस भोजपत्र को प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती स्त्री को श्रद्धापूर्वक दर्शन कराएं।
स्थापन: दर्शन कराने के पश्चात, इस अभिमंत्रित भोजपत्र को उस स्त्री के बिछावन (गद्दे या तकिए) के नीचे सुरक्षित रख दें।
परिणाम: पारंपरिक शास्त्रानुसार, इस विधि के प्रभाव से प्रसव प्रक्रिया सुगम हो जाती है और माता तथा शिशु को कष्टों से शांति मिलती है।
| शब्द | सरल अर्थ |
| भोजपत्र | एक प्राकृतिक वृक्ष की छाल, जिसका उपयोग प्राचीन काल में यंत्र और मंत्र लेखन हेतु किया जाता था। |
| केसर | अत्यंत पवित्र एवं सुगंधित जड़ी-बूटी, जिसका उपयोग तंत्र शास्त्र में शुद्ध स्याही के रूप में होता है। |
| मूढ़ गर्भ | गर्भावस्था की वह जटिल स्थिति जिसमें प्रसव समय पर न हो रहा हो या अत्यधिक पीड़ा हो रही हो। |
| बिछावन | सोने का स्थान, बिस्तर या गद्दे के नीचे का भाग। |
विशेष नोट: यह विद्या प्राचीन भारतीय लोक-विज्ञान का एक हिस्सा है। प्रसव जैसे संवेदनशील समय में, इस तांत्रिक प्रयोग के साथ-साथ चिकित्सा परामर्श और चिकित्सकीय सहायता (Medical Assistance) का पालन करना सर्वोपरि है। यह मंत्र केवल मानसिक शांति और आध्यात्मिक संबल प्रदान करने हेतु एक पूरक विधि है।
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