यह तांत्रिक विधान विशेष रूप से साधना काल में या किसी भी आकस्मिक संकट के समय स्वयं के अंगों और प्राणों की रक्षा करने हेतु अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।
जब आप स्वयं को किसी भी प्रकार की अदृश्य बाधा या भय से सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो निम्नलिखित विधि का पालन करें:
विधि / Method: पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ रावण सुरक्षा मंत्र का 7 बार स्पष्ट पाठ करें।
मार्जन क्रिया / Cleansing Action (Marjan): मंत्र पाठ के दौरान या तुरंत बाद, अपने शरीर के अंगों पर 7 बार फूंक (मार्जन) मारें।
लाभ / Benefits: इस क्रिया से साधक के भीतर का समस्त भय नष्ट हो जाता है। यह सुरक्षा कवच मार्ग में मिलने वाले हिंसक जीवों, जंतुओं या किसी भी प्रकार की अदृश्य व्याधा (नकारात्मक शक्तियों) से साधक की रक्षा करता है।
अपने साधना स्थल या रहने के स्थान को पूरी तरह सुरक्षित और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त रखने के लिए सुरक्षा घेरा बनाना अत्यंत आवश्यक है:
अभिमंत्रण / Consecration (Abhimantran): किसी भी लोहे की वस्तु (जैसे चाकू, त्रिशूल या लोहे की छड़) को माध्यम बनाएं। इस वस्तु पर मंत्र का 7 बार जप करके इसे सिद्ध कर लें।
घेरा बनाना / Creating the Circle: सिद्ध की गई लोहे की वस्तु से अपने चारों ओर एक निरंतर रेखा (घेरा) खींचें। ध्यान रहे कि घेरा कहीं से भी टूटा हुआ न हो।
प्रभाव / Effect: यह अभिमंत्रित घेरा एक सूक्ष्म रक्षा-दीवार का निर्माण करता है, जिसके भीतर कोई भी नकारात्मक या तामसिक शक्ति प्रवेश करने में पूर्णतः असमर्थ रहती है।
एकाग्रता / Concentration: मंत्र जप करते समय आपका ध्यान केवल सुरक्षा और अपने इष्ट पर होना चाहिए।
लोहे का महत्व / Importance of Iron: तंत्र शास्त्रों में 'लोहा' नकारात्मक ऊर्जा को रोकने में सबसे प्रभावी माना गया है, इसलिए सुरक्षा घेरा बनाने के लिए लोहे की वस्तु का ही चयन करें।
नियमितता / Consistency: यदि आप किसी कठिन साधना में हैं, तो प्रतिदिन इस सुरक्षा कवच का प्रयोग करना लाभकारी होता है।
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