राहु देव महासाधना: माया, आकस्मिक बाधा निवारण एवं सुरक्षा का अनुष्ठान
ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक शक्तिशाली 'छाया ग्रह' माना गया है। राहु की ऊर्जा जीवन में आकस्मिक बदलाव, जटिलताओं और अतींद्रिय शक्तियों का प्रतिनिधित्व करती है। यदि आप कालसर्प दोष, आकस्मिक संकटों या राहु की महादशा के प्रभावों को शांत करना चाहते हैं, तो राहु देव की महासाधना अत्यंत प्रभावशाली उपाय है।
| विवरण | विवरणात्मक जानकारी |
| कुल जाप संख्या | 18,000 मंत्र (कलियुग विधान के अनुसार 72,000 जाप) |
| जाप का समय | रात्रि के समय (रात 9:00 बजे के बाद सर्वोत्तम) |
| वस्त्र एवं आसन | नीले, धुएँ (Grey) या काले रंग के वस्त्र |
| माला | गोमेद या रुद्राक्ष की माला |
साधना के दौरान इन मंत्रों का पाठ करें:
ध्यान मंत्र: ओँ राहुः करालबदनः कृष्णबर्णः सिंहिकासुतः। दक्षाभयप्रदकरो बरदश्च महाबलः सदा भवतु मे सुखदो बिधाता।।
पूजा मंत्र: ओँ ऐं ह्रीं राहवे नमः।
प्रणाम मंत्र: अर्धकायं महाबीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्। सिंहिकागर्भसम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्।।
दिशा: साधना हेतु दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) की ओर मुख करके बैठें।
विशेष पूजन विधि: शांति और एकाग्रता के लिए पूजा स्थान पर धूप या लोबान जलाएं। राहु देव को काले उड़द या नीले रंग के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
जाप संकल्प: कलियुग के प्रभाव को देखते हुए 72,000 मंत्रों का जाप करना श्रेयस्कर है। इसे आप अपनी सुविधानुसार प्रतिदिन की मालाओं में विभाजित कर पूर्ण कर सकते हैं।
उच्चारण: मंत्रों का शुद्ध उच्चारण करें, जिसमें 'व' को 'ब' और 'श/ष' को 'श' के रूप में उच्चारित किया जाना चाहिए।
विशेष परामर्श
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