यह प्रयोग दो व्यक्तियों के बीच अत्यधिक मनमुटाव या विद्वेषण (अलगाव) उत्पन्न करने के लिए किया जाता है।
"ओं नमो नारायणाय अमुकस्य अमुकेन सह बच्छेदं कुरु कुरु स्वाहा।"
सिद्ध काल (शुभ मुहूर्त): इस मंत्र को जाग्रत व सिद्ध करने के लिए ग्रहण काल, अमावस्या की रात्रि अथवा दीपावली की महानिशा का चयन करें।
जप संख्या: उक्त शुभ मुहूर्त में एकांत स्थान पर बैठकर इस मंत्र का 10,000 बार जप करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है।
मंत्र में नाम परिवर्तन: मंत्र पढ़ते समय जहाँ 'अमुकस्य अमुकेन' शब्द आता है, वहां उन दो व्यक्तियों के नाम का उच्चारण करें जिनके बीच अलगाव कराना है।
सामग्री एवं अभिमंत्रण: मंत्र सिद्ध होने के बाद, साधक अपने एक हाथ में कौए (काक) का पंख और दूसरे हाथ में उल्लू का पंख ले। इन दोनों पंखों को एक साथ मिलाकर सिद्ध मंत्र से 108 बार पुनः अभिमंत्रित करें (मंत्र पढ़कर पंखों पर फूंक मारें)।
बंधन क्रिया: अभिमंत्रण के पश्चात, दोनों पंखों को एक काले सूती धागे से एक साथ कसकर बांध दें।
विसर्जन एवं समय अवधि: इस पोटली को लेकर किसी नदी, सरोवर या तालाब के किनारे जाएं और जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर दबा दें। यह क्रिया 7 दिनों तक करने (या लगातार 7 दिनों तक दबे रहने) से उन दोनों व्यक्तियों के बीच विद्वेषण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
साधना काल के दौरान किसी भी प्रकार की शंका, दुविधा, मंत्र-उच्चारण में असमर्थता या विशेष मार्गदर्शन के लिए आप सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे के बीच हमारे केंद्र के साधना विशेषज्ञ से सलाह प्राप्त कर सकते हैं।
परामर्श हेल्पलाइन नंबर: 7668607892
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