यह प्रक्रिया पूरी तरह से एकाग्रता, साहस और निश्चित तांत्रिक नियमों के पालन पर आधारित है। इसे अत्यंत सावधानी और गोपनीयता के साथ संपन्न करने का विधान है।
शुभ मुहूर्त: इस प्रयोग की सिद्धि के लिए शनिवार अथवा मंगलवार की 'कालरात्रि' (मध्यरात्रि) का समय सबसे उपयुक्त माना गया है।
स्थान: तांत्रिक क्रिया की प्रभावशीलता के लिए साधक को पूरी गोपनीयता बरतते हुए शत्रु के घर के आंगन (प्रांगण) में प्रवेश करना होता है।
इस प्रयोग को करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन आवश्यक बताया गया है:
मंत्रोच्चारण: साध्य या शत्रु का नाम लेते हुए ('फलनार' के स्थान पर), पूरी एकाग्रता के साथ मुख्य मंत्र का 21 बार पाठ करना होता है।
तांत्रिक मुद्रा: मंत्र के प्रत्येक पाठ के साथ एक बार चुटकी बजाने या ताली मारने की क्रिया अनिवार्य है, जिससे कुल 21 बार मंत्र और 21 बार ताली/चुटकी का मेल बनता है।
गोपनीयता: इस क्रिया को पूर्ण करने के बाद बिना पीछे मुड़े और बिना किसी से वार्तालाप किए साधक को सीधे अपने गंतव्य पर वापस आ जाना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति पर इस प्रकार के प्रयोग का नकारात्मक प्रभाव होने का संदेह हो, तो उसे हटाने के लिए निम्नलिखित उपाय बताए गए हैं:
यंत्र निर्माण: विशिष्ट यंत्र को 'भोजपत्र' पर 'अष्टगंध' से निर्मित किया जाता है।
धारण: इस तैयार यंत्र को ताबीज के रूप में पीड़ित व्यक्ति के गले में धारण कराया जाता है। लोक-विश्वास के अनुसार, ऐसा करने से कोई भी ऊपरी साया या भूत-बाधा तुरंत अपना प्रभाव छोड़ देती है।
अति महत्वपूर्ण चेतावनी (Disclaimer): उपर्युक्त विवरण केवल शैक्षिक और शोध की दृष्टि से तंत्र ग्रंथों के सार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। व्यवहारिक जीवन में, किसी के घर में अनधिकृत प्रवेश करना या किसी को मानसिक/शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनी रूप से दंडनीय अपराध भी है। तंत्र विद्या के ये प्रयोग पूरी तरह से अंधविश्वास और किंवदंतियों पर आधारित हैं। हम इस प्रकार की किसी भी क्रिया को आजमाने की अनुशंसा नहीं करते हैं। शत्रुता या विवाद की स्थिति में हमेशा संवाद, कानूनी प्रक्रिया या सकारात्मक समाधानों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए।
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