यह प्रयोग किन्हीं दो व्यक्तियों (जैसे अनैतिक या अनुचित संबंधों में लिप्त) के मध्य सात्विक व धर्मसम्मत कारणों से दूरी या मनमुटाव (विद्वेषण) उत्पन्न करने के लिए एक प्राचीन तांत्रिक विधि मानी जाती है।
मंत्र का शुद्ध उच्चारण इस प्रकार है:
"बाबा सरषे क्यैरा रक्त। पाटेर माटी मशान की हाई।। पक्कइ बीजा करल तलपाताड़। अमुका कता ना देखे अमुखी का छार।। मेयी चंडी गुरु की शक्ति, कुरु कुरु मह ईश्वरो बाचा, सत्यनाम आदेश गुरु का।।"
इस प्रयोग की सिद्धि और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
नाम प्रतिस्थापन नियम (Name Substitution Rules): मंत्र में जहाँ 'अमुका' (पुरुष हेतु) और 'अमुखी' (स्त्री हेतु) शब्द अंकित हैं, वहाँ उन संबंधित व्यक्तियों के नाम लें जिनके मध्य आप दूरी उत्पन्न करना चाहते हैं।
हवन सामग्री व अनुष्ठान (Havan Materials and Ritual): सफेद सरसों (सरसों), राई और श्मशान की भस्म को समान मात्रा में मिलाकर मिश्रण तैयार करें। आम की लकड़ी (समिधा) से प्रज्वलित पवित्र अग्नि में, मंत्र का निरंतर पाठ करते हुए 108 बार इस मिश्रण की आहुति दें।
प्रयोग की पूर्णता (Completion of the Ritual): हवन के उपरांत बची हुई भस्म को सुरक्षित रख लें। इस सिद्ध भस्म को उस स्थान पर छिड़कें जहाँ वे दोनों बैठते हों, अथवा उनके घर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने डाल दें। इससे दोनों के मध्य तीव्र विद्वेषण होता है।
चेतावनी: इस प्रकार के विद्वेषण प्रयोग अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। इनका उपयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब सात्विक व धर्मसम्मत कारण अत्यंत अनिवार्य हों। किसी के निजी जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप या द्वेषपूर्ण भावना से किया गया ऐसा कोई भी कार्य नैतिक रूप से अनुचित हो सकता है। कृपया इसका प्रयोग सोच-समझकर और पूर्ण सावधानी के साथ करें।
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