यह एक अत्यंत शक्तिशाली तांत्रिक देह-बंधन विधान है, जो पीर-परंपरा की ऊर्जा से साधक के शरीर को पूरी तरह कीलित और सुरक्षित कर देता है। यह प्रयोग नकारात्मक ऊर्जा, तांत्रिक प्रहार और अदृश्य बाधाओं को साधक के प्रभाव क्षेत्र से बाहर रखने के लिए अचूक माना गया है।
इस शक्तिशाली सुरक्षा कवच को सक्रिय करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
साधना निर्देश / Sadhana Instructions: एकांत स्थान पर बैठकर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ इस मंत्र का पाठ करें।
विशेष क्रिया / Special Ritual: मंत्र पाठ के पश्चात अपने स्वयं के शरीर पर 3 बार फूंक मारें। इसके तुरंत बाद अपने दाहिने पैर के तलवे के नीचे भूमि पर 3 बार थूकें (थूकना)।
अनिवार्य निर्देश / Mandatory Instructions: यह भौतिक क्रिया मंत्र की सूक्ष्मतम ऊर्जा को शरीर में स्थापित और जागृत करने के लिए अनिवार्य मानी गई है। इसके बिना रक्षा कवच पूर्ण रूप से सक्रिय नहीं होता।
अपने स्थान या साधना स्थल को नकारात्मकता से मुक्त रखने हेतु यह प्रक्रिया अपनाएं:
विधि / Method: किसी भी लोहे की वस्तु पर इस मंत्र का 7 बार जप करके उसे सिद्ध (अभिमंत्रित) कर लें।
घेरा खींचना / Drawing the Circle: उस अभिमंत्रित वस्तु का उपयोग करते हुए अपने चारों ओर एक सुरक्षा रेखा (घेरा) खींच दें।
प्रभाव / Effect: इस अभिमंत्रित घेरे के भीतर कोई भी नकारात्मक शक्ति, पिशाच बाधा या तामसिक प्रभाव प्रवेश करने में पूर्णतः असमर्थ होगी।
पूर्ण देह-बंधन: यह मंत्र साधक के शरीर को अभेद्य बनाता है, जिससे किसी भी तांत्रिक प्रयोग का साधक पर असर नहीं होता।
अदृश्य सुरक्षा: यह पीर-पाश तंत्र साधक के चारों ओर एक ऐसा घेरा बनाता है जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश: यह प्रयोग आसपास मौजूद नकारात्मक स्पंदनों को समाप्त कर देता है, जिससे कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं।
अचूक प्रभाव: अपनी विशेष भौतिक क्रिया (पद-स्पर्श विधि) के कारण, यह अन्य सामान्य सुरक्षा मंत्रों की तुलना में अधिक तीव्र और त्वरित परिणाम देने वाला है।
साधक हेतु विशेष परामर्श: "साधना का मार्ग विश्वास और अनुशासन का है। प्रत्येक क्रिया को विधिपूर्वक करने से ही सिद्धि प्राप्त होती है।"
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