यह 'निम्ब काष्ठ गणपति सर्वकार्य सिद्धि साधना' का एक अत्यंत व्यवस्थित और प्रभावशाली विवरण है। आप इसे अपनी साधना सामग्री या प्रचार प्रारूप के लिए इस प्रकार उपयोग कर सकते हैं:
सनातन तंत्र और गाणपत्य संप्रदाय में भगवान गणेश की साधना सभी बाधाओं के नाश और त्वरित कार्य सिद्धि के लिए सर्वोपरि है। नीम की लकड़ी (निम्ब काष्ठ) से निर्मित गणपति की यह साधना जीवन की रुकावटों, व्यापारिक मंदी, कानूनी विवादों या वर्षों से अटके कार्यों को निर्विघ्न पूर्ण करने के लिए एक अचूक और तीव्र चमत्कारी तांत्रिक प्रयोग है।
विग्रह (मूर्ति) निर्माण — 'लाक्षोदर गणेश': नीम की सूखी और पवित्र लकड़ी से भगवान गणेश की प्रतिमा निर्मित करवाएं। उनके उदर (पेट) वाले भाग में रिक्त (खोखला) स्थान रखकर उसमें पिघली हुई शुद्ध लाख (लाक्षा) भरें। तंत्र शास्त्र में इसे 'लाक्षोदर गणेश' कहा जाता है, जो समस्त दरिद्रता के नाश के लिए प्रसिद्ध है।
पूजन विधान और स्थापना: किसी भी शुभ 'सिद्धियोग', रवि-पुष्य नक्षत्र या गणेश चतुर्थी के दिन मूर्ति की स्थापना करें। पंचोपचार (धूप, दीप, गंध/चंदन, लाल पुष्प, और नैवेद्य) से विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें।
विशेष तांत्रिक क्रिया: पूजा संपन्न होने के बाद, भगवान गणेश पर चढ़ाए गए पुष्प, दूर्वा और अक्षत (निर्माल्या) को आदरपूर्वक उठाएं। इन्हें शुद्ध शहद से भरे एक पात्र में डुबोकर सुरक्षित रख दें।
अटके कार्यों की सिद्धि: बड़े से बड़ा रुका हुआ कार्य, सरकारी टेंडर या फंसा हुआ धन बिना किसी रुकावट के प्राप्त होता है।
व्यापारिक मंदी से मुक्ति: इस विग्रह की उपस्थिति से व्यापार में तीव्र वृद्धि और धन का निरंतर आगमन होने लगता है।
शत्रु और विघ्न बाधाओं का नाश: नीम की लकड़ी में नकारात्मक ऊर्जाओं को सोखने की स्वाभाविक क्षमता है, जो शत्रु बाधा को शांत कर जीवन को तनावमुक्त बनाती है।
यह साधना अत्यंत उग्र और सात्विक दोनों रूप में फलदायी है।
साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
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