महा नृसंह मंत्र (महा नृसंह मन्त्र)
यह भगवान नृसंह का एक अत्यंत उग्र, तेजस्वी और अचूक मंत्र है। इसका प्रयोग असाध्य से असाध्य रोगों और
अकाल मृत्यु के संकट को टालने के लए कया जाता है।
मुख्य मन्त्र (बंगाली उच्चारण — शुद्ध हंदी लप में):
"ॐ नमः भगवते नृसंहाय प्रदीप्तसूयकोट सहस्र-समतेजसे वज्रनख-दंष्ट्राय स्फु रत महाणवतोद
दुन्दुभ-नघषाय-त्रायह भगवन्नृसंह। श्रीअमुकस्य एतद्रोगात् झटत नागाय नासय। स्तम्भय स्तम्भय मोहय
मोहय वदारय वदारय वह्वङ्गे हू ं क्ष्रौं फट् स्वाहा।"
वशेष नदश: मंत्र के भीतर आने वाले शब्द 'श्रीअमुकस्य' के स्थान पर उस असाध्य रोगी व्यिक्त के नाम का
स्पष्ट उच्चारण करना अनवाय है िजसके लए यह साधना की जा रही है।
पारंपरक वध एवं वस्तृत ववरण:
साधना के नयम: इस साधना के लए साधक का आंतरक रूप से सुदृढ़ और पवत्र होना आवश्यक है। शनवार के
दन शुभ मुहूत में इस अनुष्ठान का आरंभ करें।
अनुष्ठान या: शनवार को पीपल के वृक्ष (अश्वत्थ) की मुख्य जड़ को स्पश करते हुए, पूण ब्रह्मचय और
एकाग्रता के साथ इस महा नृसंह मंत्र का कुल 1,000 (एक हजार) बार जप करना होता है।
प्राप्त होने वाला लाभ: यह महामंत्र इतना तीव्र और प्रभावशाली है क इसके प्रभाव से यद कोई रोगी मृत्यु के
अत्यंत नकट भी पहु ंच चुका हो (असाध्य या डॉक्टरों द्वारा त्याज्य िस्थत में हो), तो भी उसे जीवनदान मलता है
और भयंकर व्याधयों का तत्काल नाश होता है।
शंका समाधान एवं वशेषज्ञ परामश
यद आपको इन मंत्रों के शुद्ध उच्चारण में, अक्षरों को समझने में या साधना की जटल वधयों को संपन्न करने
में कसी भी प्रकार की शंका, दुवधा या असु वधा महसूस होती है, तो स्वयं के स्तर पर कोई गलत नणय न लें।
आपकी सहायता और मागदशन के लए हमारे केंद्र के साधन वशेषज्ञ (अनुभवी साधक एवं वद्वान) सदैव तत्पर
हैं। कसी भी प्रकार के प्रामाणक परामश के लए आप नीचे दए गए समय पर सीधे संपक कर सकते हैं:
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परामश का समय: सुबह 10:00 बजे से शाम 06:00 बजे के मध्य
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शंका समाधान हेल्पलाइन: 7668607892