यह एक उग्र और अचूक रक्षा कवच मंत्र है, जो विशेष रूप से साधक की चारों दिशाओं से सुरक्षा करने के लिए निर्मित है। इसके निरंतर अभ्यास से साधक के चारों ओर 'लोहार गढ़' (लोहे का अभेद्य किला) निर्मित हो जाता है, जिसे कोई भी नकारात्मक शक्ति भेद नहीं सकती।
इस उग्र रक्षा कवच को सक्रिय करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
साधना निर्देश / Sadhana Instructions: इस मंत्र को योग्य गुरु के मार्गदर्शन में सिद्ध करें। साधना के दौरान शुद्ध, पवित्र आसन पर बैठें और पूर्ण एकाग्रता के साथ इस मंत्र का 7 बार पाठ करें।
क्रिया विधि / Ritual Method: मंत्र पाठ के दौरान अपने शरीर के मुख्य अंगों के पास 'चुटकी' बजाते रहें, अथवा मंत्र पूर्ण होने पर अपने संपूर्ण शरीर पर 7 बार फूंक मारें। यह क्रिया आपके शरीर को कवच में कीलित कर देती है।
अपने साधना स्थल या निवास को नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्त रखने के लिए यह प्रक्रिया अपनाएं:
विधि / Method: किसी भी लोहे की वस्तु पर इस मंत्र का 7 बार जप करके उसे पूर्णतः सिद्ध (अभिमंत्रित) कर लें।
घेरा खींचना / Drawing the Circle: उस अभिमंत्रित वस्तु का उपयोग करते हुए अपने चारों ओर एक सुरक्षा रेखा (घेरा) खींच दें।
अभेद्य लोहार गढ़: इस साधना के प्रभाव से साधक का शरीर एक ऐसे अदृश्य लोहे के किले में सुरक्षित हो जाता है, जो हर प्रकार के टोने-टोटके और मारण प्रयोगों को विफल कर देता है।
चौमुखी सुरक्षा: यह मंत्र साधक की चारों दिशाओं से रक्षा करता है, जिससे किसी भी अनिष्ट का भय नहीं रहता।
निर्भयता: इस कवच के कारण साधक अत्यंत कठिन तांत्रिक कार्यों के दौरान भी निर्भय और स्थिर बना रहता है।
अचूक रक्षा: यह प्रयोग अत्यंत उग्र है, जो तांत्रिक बाधाओं और अदृश्य शक्तियों को तत्काल प्रभाव से दूर रखता है।
साधक हेतु विशेष परामर्श: "सही मार्गदर्शन ही साधना की सफलता का आधार है। अपनी ऊर्जा को सदैव सकारात्मक और अनुशासित रखें।"
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