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खतरनाक तांत्रिक तंत्र पलटानी स्वयं सिद्ध बंगाली मंत्र
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खतरनाक तांत्रिक तंत्र पलटानी स्वयं सिद्ध बंगाली मंत्र

नकारात्मक प्रभाव एवं तंत्र-बाधा निवारण हेतु एक उग्र प्रयोग

यह मंत्र 'स्वयं सिद्ध' श्रेणी में आता है। इसका अर्थ है कि इसके लिए किसी दीर्घकालीन अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती; सही विधि और पूर्ण विश्वास से यह तत्काल प्रभाव दिखाता है।

1. मूल मंत्र का बंगाली उच्चारण (हिंदी लिपि में)

तांत्रिक विद्या में उच्चारण की लय और शुद्धता सर्वोपरि है। इसे इसी गति और लहजे में पढ़ें:

"शव-शंकर फरिया, पथ धरये पथे आसलु, तुइ से पथेई फराबी, मुइ, मुइ फराचु काली। चंडीर पुत्र तुइ हे काली, तुइ हे भूत, काली। चंडीर उपर यदि चडाब घाओ, शव-शंकरेर माथाय मुछब दुइ पाओ॥"

2. मंत्र का गूढ़ रहस्य एवं भावार्थ

इस मंत्र में देवी-देवताओं को दी जाने वाली 'दुहाई' का प्रयोग किया गया है, जो तंत्र जगत में अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है:

  • मार्ग परिवर्तन: मंत्र का अर्थ है— "हे अदृश्य शक्ति, तू जिस रास्ते से आई है, उसी रास्ते से वापस लौट जा। मैं महाकाली की दुहाई देकर तुझे वापस भेज रहा हूँ।"

  • उग्र दुहाई (शक्ति-शपथ): मंत्र का अंतिम अंश तंत्र की एक 'उग्र दुहाई' है। इसमें साधक ईश्वर का आह्वान करते हुए कहता है कि यदि इस संकट ने शक्ति (चंडी) पर प्रहार करने का दुस्साहस किया, तो वह स्वयं के संकल्प से नकारात्मक ऊर्जा को विवश कर देगा।

नोट: यह पंक्तियाँ ईश्वर का अपमान नहीं, बल्कि तांत्रिक जगत की एक 'बाध्यकारी चेतावनी' हैं, जिससे अदृश्य शक्तियों को साधक का कार्य तुरंत पूर्ण करना पड़ता है।

3. विस्तृत विधि-विधान एवं व्यावहारिक निर्देश

A. मुख्य उद्देश्य (Purpose)

यह एक 'पलटानी' क्रिया है, जो किसी भी नकारात्मक प्रभाव, बुरी नजर या ऊपरी बाधा को काटने हेतु उपयोग की जाती है। यदि किसी व्यक्ति पर तांत्रिक क्रिया का हानिकारक प्रभाव हो, तो यह उसे नष्ट कर देती है।

B. आवश्यक सामग्री

  • ताजा जल: एक स्वच्छ तांबे या मिट्टी के पात्र में शुद्ध जल।

  • आसन: कुशा या ऊन का पवित्र आसन।

C. संपूर्ण कार्यविधि (Practical Steps)

  1. तीव्र गति से जाप: शांत मन से बैठें और मंत्र को तीव्र लय (Fast Rhythm) में पढ़ें। इसमें लय का टूटना वर्जित है।

  2. जल अभिमंत्रण: मंत्र पढ़ते समय पात्र के जल पर लगातार फूँक (फूत्कार) मारें, ताकि मंत्र की ध्वनि तरंगें जल में समाहित हो सकें।

  3. जल का प्रयोग: अभिमंत्रित जल की बूंदों को रोगी की आँखों पर तीव्र गति से छड़कें।

  4. विशेष तांत्रिक नियम: यदि रोगी आँखें बंद करे, तो उसे निर्देश दें कि वह आँखें खुली रखे ताकि जल की बूंदें सीधे भीतर जाएं और नकारात्मक प्रभाव को तुरंत काट सकें।

महत्वपूर्ण वैधानिक चेतावनी: तांत्रिक मंत्र और तीव्र क्रियाएं अत्यंत संवेदनशील होती हैं। इनमें चूक होने पर विपरीत परिणाम भी हो सकते हैं। अतः बिना पूर्ण ज्ञान या विशेषज्ञ (गुरु) के मार्गदर्शन के इनका प्रयोग स्वयं पर या किसी अन्य पर कदापि न करें।

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