यह प्रयोग उन साधकों के लिए अनिवार्य है जो तंत्र साधना, झाड़-फूंक या नकारात्मक ऊर्जा निवारण के कार्य करते हैं। यह विधान साधक को उग्र और तामसिक शक्तियों के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली रक्षा कवच है।
चेतावनी / Warning: किसी भी पीड़ित का झाड़ा करने या नकारात्मक ऊर्जा को विस्थापित करने से पहले अपनी देह रक्षा अवश्य करें। सुरक्षा कवच के बिना उग्र शक्तियों पर कार्य करना साधक के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से घातक सिद्ध हो सकता है।
इस रक्षा कवच को सक्रिय करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
आत्म-रक्षा / Self-Protection: सिद्ध होने के बाद, जब भी किसी कार्य या बाधा निवारण हेतु जाएं, तो सर्वप्रथम इस मंत्र का 3 बार पाठ करें और मंत्र के अंत में अपने स्वयं के शरीर पर जोर से फूंक मार लें।
घेरा खींचना (सुरक्षा कवच निर्माण) / Drawing the Protection Circle: साधना स्थल पर बैठकर अपने चारों ओर मिट्टी की ढेरी, राख या जल की धारा से 3 बार मंत्र पढ़ते हुए एक पूर्ण घेरा बना लें। इसे ही 'घेरा खींचना' कहा जाता है।
अभेद्य सुरक्षा चक्र: इस घेरे के भीतर कोई भी दुष्ट, तामसिक या नकारात्मक शक्ति प्रवेश करने में पूर्णतः असमर्थ होती है।
ऊर्जा का संरक्षण: यह मंत्र साधक की व्यक्तिगत ऊर्जा (ओज) को सुरक्षित रखता है, जिससे कठिन तांत्रिक कार्यों के बाद भी साधक थकान या रुग्णता महसूस नहीं करता।
दुष्प्रभावों से बचाव: तंत्र साधना के दौरान उत्पन्न होने वाले प्रतिघाती प्रभावों (Backlash) से यह कवच साधक की रक्षा करता है।
आत्मविश्वास व निर्भयता: इस कवच के निर्माण से साधक पूर्णतः निर्भय होकर कठिन से कठिन बाधाओं का निवारण कर सकता है।
साधक हेतु विशेष परामर्श: "साधना का मार्ग विश्वास और अनुशासन का है। सुरक्षा ही आपकी सबसे बड़ी सिद्धि है, अतः प्रत्येक तांत्रिक कार्य से पूर्व इसका अभ्यास अनिवार्य है।"
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