यह एक अत्यंत तीव्र और प्रभावी तांत्रिक विधान है, जिसका प्रयोग आपातकालीन स्थितियों में शत्रुओं की बुद्धि को भ्रमित करने और उनके अस्त्र-शस्त्रों को स्तंभित (जड़) करने के लिए किया जाता है।
यह मंत्र अचानक आए घोर संकटों या शत्रु द्वारा घेर लिए जाने की स्थिति में आत्मरक्षा के लिए अचूक है।
तत्काल प्रयोग / Immediate Use: संकट के समय भय का त्याग करें और पूरी आत्मशक्ति व विश्वास के साथ इस मंत्र का निरंतर पाठ करें।
साधना विधि / Sadhana Method:
यदि संभव हो, तो शांत भाव से बैठकर पूर्ण ध्यान के साथ इस मंत्र का 7 बार पाठ करें।
मंत्र पाठ के दौरान अपने दाहिने हाथ के अंगूठे और उंगलियों से शरीर के मुख्य अंगों के पास 'चुटकी' बजाते रहें।
वैकल्पिक रूप से, प्रत्येक मंत्र की समाप्ति पर अपने शरीर पर 'फूंक' मारते जाएं।
समाप्ति / Conclusion: अंत में 7 बार फूंक मारकर पूर्ण आत्मबल के साथ अपने कार्य या बचाव में प्रवृत्त हों।
आपातकाल में इस मंत्र के तीव्र ऊर्जा-कंपन (Vibrations) से निम्नलिखित प्रभाव उत्पन्न होते हैं:
बुद्धि का भ्रम / Confusion of Intellect: आक्रमणकारियों की बुद्धि तत्काल भ्रमित हो जाती है।
शस्त्र स्तंभन / Stambhan of Weapons: शत्रु के हाथों में मौजूद धारदार या घातक अस्त्र-शस्त्र वहीं स्तंभित (बंध) हो जाते हैं।
निष्प्रभावी वार / Ineffective Attack: शत्रु का हाथ शिथिल (कमजोर) पड़ जाता है और वह वार करने में असमर्थ या निष्प्रभावी हो जाता है।
"सही मार्गदर्शन ही साधना की सफलता का आधार है। संकट के समय साहस और मंत्र शक्ति ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।"
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