यह मंत्र कृषि क्षेत्र को टिड्डियों के प्रकोप और अन्य कीड़ों से सुरक्षित रखने के लिए एक पारंपरिक तांत्रिक उपाय के रूप में प्रयोग किया जाता है।
मंत्र का शुद्ध उच्चारण इस प्रकार है:
"ॐ नमो कामाख्या देवी को अज्र बांधू बज्र बांधू, बांधू दशो दुआर, लोहे का कोड़ा हनुमान ठोके गिरे धरती लागे घाव सब टिड्डी भस्मी हो जाए, बांधू टिड्डा बांधू नाला ऊपर ठोंकू बज्र का ताला नीचे भैरों किलकिलाय, ऊपर हनुमान गाजैं हमारी सीवे में दाना पानी खावे तो गुरु गोरखनाथ लजावे"
इस सुरक्षा प्रयोग को प्रभावी बनाने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:
अभिमंत्रण (Energizing): हवन की भभूति (Ash) को किसी पात्र में लें। इस भभूति पर उपरोक्त मंत्र का 11 बार पाठ करते हुए फूंक (दम) मारें और उसे मंत्र से सिद्ध करें।
प्रयोग (Application): अभिमंत्रित भभूति को लेकर अपने खेत के चारों ओर की सीमा पर छिड़काव करें।
टिड्डियों के प्रकोप से सुरक्षा (Protection from Locusts): यह प्रयोग खेत को टिड्डी दल के आक्रमण से बचाने में सहायक माना जाता है।
फसल की रक्षा (Crop Protection): यह खेत में लगने वाले हानिकारक कीड़ों के प्रभाव को कम करने और फसलों को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
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