यहाँ आपकी वेबसाइट के लिए 'हनुमान वज्र कवच' पर आधारित सुव्यवस्थित विवरण तैयार है:
कलयुग के जाग्रत देवता वीर हनुमान जी का यह 'वज्र कवच' एक अत्यंत उग्र और शक्तिशाली शाबर मंत्र है। इस मंत्र के प्रभाव से साधक का शरीर वज्र के समान अभेद्य और सुरक्षित हो जाता है। संसार की कोई भी तामसिक शक्ति, मारक विद्या या नकारात्मक ऊर्जा इस कवच को भेदने में असमर्थ है।
(शुद्ध बंगाली उच्चारण — देवनागरी लिपि)
"ॐ नमो बज्र का कोठा। जिसमे पिण्ड हमारा बैठा। ईश्वर उग्र कुंजी बज्र का ताला। अठो ईयाम का हनुमान रखवाला।।"
इस महावीर कवच मंत्र की साधना और सिद्धि का सर्वोत्तम समय शनिवार है। यह साधना केवल शनिवार के दिन ही संपन्न की जानी चाहिए।
ब्रह्मचर्य व व्रत: साधना के दिन साधक पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें और व्रत (उपवास) रखें।
पूजन: हनुमान जी के मंदिर में या घर के एकांत कक्ष में उनकी प्रतिमा के सम्मुख बैठकर शुद्ध सिंदूर, चमेली का तेल, धूप, दीप और पुष्प अर्पित कर विधिवत पूजन करें।
हनुमान जी की ज्योति (लौ) अथवा उनके विग्रह की ओर देखते हुए, पूर्ण निष्ठा और श्रद्धा के साथ इस मंत्र का 1,008 बार जाप करें। इस अनुष्ठान से मंत्र साधक के लिए सिद्ध (जाग्रत) हो जाता है।
मंत्र के सिद्ध हो जाने के बाद, आप इसका उपयोग दैनिक जीवन में सुरक्षा कवच के रूप में कर सकते हैं:
प्रयोग: जब भी आप किसी संकटग्रस्त स्थान, श्मशान भूमि या किसी नकारात्मक प्रभाव वाली जगह पर जाएं, अथवा किसी तांत्रिक कार्य हेतु घर से निकलें, तो प्रस्थान से पूर्व इस मंत्र को 3 बार पढ़ें।
विधि: पाठ करने के पश्चात अपने सीने और पूरे शरीर पर फूंक मार लें। यह प्रक्रिया आपको डाकिनी-शाकिनी, भूत-प्रेत और समस्त अभिचार कर्मों (तंत्र क्रियाओं) से सुरक्षित रखेगी।
विशेष सूचना
हनुमान जी की यह वज्र कवच साधना अत्यंत सात्विक और उग्र है। इसके प्रयोग में पूर्ण अनुशासन और विश्वास आवश्यक है। किसी भी प्रकार की शंका या विशेष परिस्थिति में अनुष्ठान संबंधी मार्गदर्शन के लिए केंद्र के विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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