यह प्रयोग हनुमान जी की असीम कृपा से साधक के चारों ओर एक अभेद्य रक्षा कवच का निर्माण करता है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण कार्यों, व्यापारिक यात्राओं और कठिन परिस्थितियों में मार्ग की समस्त नकारात्मक शक्तियों और अदृश्य बाधाओं को नष्ट करने के लिए एक अत्यंत प्रभावी तांत्रिक विधान है।
इस सुरक्षा विधान को पूर्ण करने हेतु निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
अनुष्ठान काल / Time of Ritual: किसी विशेष कार्य, व्यापार या महत्वपूर्ण यात्रा के लिए घर से निकलते समय इस प्रयोग का विशेष महत्व है।
क्रिया विधि / Procedure: प्रस्थान करते समय शांत चित्त होकर अपने इष्टदेव का स्मरण करें और 1 बार मंत्र का उच्चारण कर अपना दाहिना पैर बाहर निकालें।
साधना / Sadhana: पवित्र आसन पर बैठकर पूर्ण श्रद्धा के साथ इस मंत्र का 7 बार पाठ करें। मंत्र पाठ के दौरान अपने शरीर के मुख्य अंगों के पास 'चुटकी' बजाते रहें अथवा प्रत्येक मंत्र की समाप्ति पर अपने शरीर पर 'फूंक' मारें।
अपने निवास या कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह सरल प्रक्रिया अपनाएं:
विधि / Method: किसी भी लोहे की वस्तु पर इस मंत्र का 7 बार जप करके उसे सिद्ध (अभिमंत्रित) कर लें।
घेरा / Protection Circle: उस अभिमंत्रित वस्तु का उपयोग करते हुए अपने चारों ओर एक सुरक्षा रेखा (घेरा) खींच दें।
यात्रा सुरक्षा: यात्रा मार्ग में चोरों, हिंसक पशुओं और विषैले जीवों के भय से पूर्ण सुरक्षा मिलती है।
तांत्रिक बाधाओं का नाश: यह कवच किसी भी प्रकार के तांत्रिक अभिचार या नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को साधक तक पहुँचने नहीं देता।
अजेय सुरक्षा कवच: हनुमान जी के आशीर्वाद से साधक का शरीर एक अभेद्य दुर्ग के समान सुरक्षित हो जाता है।
कार्य सिद्धि: यह प्रयोग न केवल सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि कार्य में आने वाली बाधाओं को भी दूर कर सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।
साधक हेतु विशेष परामर्श: "सही मार्गदर्शन ही साधना की सफलता का आधार है। संकट के समय साहस और मंत्र शक्ति ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।"
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