गुरु गोरखनाथ जी की शाबर और सिद्ध परंपरा में आज्ञा चक्र (तीसरा नेत्र) जागरण के मंत्र अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं। शाबर मंत्र अपनी सरलता, प्रभावशीलता और त्वरित फल देने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। यह साधना आपके मानसिक, आध्यात्मिक और सिक्स सेंस (Sixth Sense) को बढ़ाने के लिए एक दिव्य मार्गदर्शक की तरह काम करती है। In Guru Gorakhnath's Shabar and Siddha tradition, mantras for awakening the Ajna Chakra (Third Eye) are considered extremely powerful. Shabar mantras are known for their simplicity, effectiveness, and quick results.
मंत्र (Mantra):
॥ ॐ गुरु जी! अलख निरंजन, चेत चेत रे अवधूत! आज्ञा चक्र में जोत जगाओ, गोरखनाथ सिद्ध फल पाओ। ॐ ह्रीं श्रीं तृतीय नेत्राय नमः ॥
भावार्थ (Meaning): हे अलख निरंजन गुरुदेव! हे चेतना स्वरूप अवधूत! मेरे आज्ञा चक्र (दोनों भौहों के मध्य) में ज्ञान और प्रकाश की ज्योति प्रज्वलित कीजिए। श्री गोरखनाथ जी की कृपा से मुझे इस साधना का सिद्ध फल प्राप्त हो। मैं भगवान शिव और शक्ति के तृतीय नेत्र के दिव्य स्वरूप को नमन करता हूँ।
स्थान और वातावरण (Place & Environment): घर का पूजा घर, कोई शांत कमरा या एकांत स्थान जहाँ कोई विघ्न न डाले। (A clean, peaceful place or home temple).
दिशा (Direction): पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर मुख करके बैठें। (Sit facing East or North).
समय (Timing): सर्वश्रेष्ठ समय ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4:00 से 6:00 बजे के बीच) या वैकल्पिक रूप से रात को सोने से पहले (रात 9:00 से 11:00 बजे के बीच)। (Brahma Muhurta or before sleeping at night).
आसन और सामग्री (Mat & Materials): कुशा (घास) का आसन या ऊन (Woolen) का लाल/पीला आसन, रुद्राक्ष की माला, और गाय के घी या तिल के तेल का दीपक। (Kusha or woolen mat, Rudraksha mala, and a lamp).
आचमन और पवित्रता (Purification): हाथ-मुंह धोकर, स्वच्छ वस्त्र (सूती या हल्के कपड़े) पहनकर बैठें। (Wash hands and face, wear clean clothes).
गुरु स्मरण (Guru Remembrance): सबसे पहले अपने इष्टदेव और गुरु गोरखनाथ जी का ध्यान करें। (Remember your deity and Guru Gorakhnath).
प्राणायाम (Pranayama): मंत्र जाप शुरू करने से पहले 5 से 10 मिनट अनुलोम-विलोम या गहरी सांस (Deep Breathing) लें। (Practice deep breathing for 5-10 minutes).
ध्यान की स्थिति (Meditation Posture): रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें, आँखें बंद करके अपना ध्यान दोनों भौहों के बीच स्थित 'तीसरे नेत्र' (आज्ञा चक्र) पर केंद्रित करें। (Keep the spine straight and focus on the Third Eye).
मंत्र जाप (Chanting): रुद्राक्ष की माला से रोजाना कम से कम 1 माला (108 बार) मध्यम आवाज में लयबद्ध तरीके से जाप करें। (Chant at least 1 mala of 108 times daily using a Rudraksha rosary).
नियम (Do's):
निरंतरता (Consistency): इस साधना को कम से कम 21 या 41 दिनों तक बिना नागा (बिना गैप के) करें। (Perform for 21 or 41 continuous days without break).
सत्य और मधुर वाणी (Truth & Sweet Speech): साधना काल में झूठ बोलने से बचें और वाणी में मधुरता रखें। (Avoid lying and maintain soft speech).
सात्विक आहार (Satvic Diet): शुद्ध, हल्का और सात्विक भोजन ग्रहण करें। (Consume pure and light satvic food).
परहेज (Don'ts):
तामसिक वस्तुएं (Tamasic Items): मांस, मदिरा, शराब, लहसुन, प्याज और नशीले पदार्थों का पूर्ण त्याग करें। (Complete avoidance of meat, alcohol, garlic, onion, and intoxicants).
क्रोध और वासना (Anger & Lust): काम, क्रोध, लोभ और दूसरों की बुराई करने से बचें। (Avoid anger, greed, and bad-mouthing).
गोपनीयता (Secrecy): इस साधना और अपने अनुभवों को हर किसी के सामने उजागर न करें। (Keep the practice and experiences confidential).
⚠️ विशेष ध्यान दें: आज्ञा चक्र अत्यंत संवेदनशील ऊर्जा केंद्र है जो जैविक रूप से 'पीनियल ग्लैंड' (Pineal Gland) से जुड़ा होता है।
सिरदर्द या भारीपन (Headache or Heaviness): शुरुआत में भौहों के बीच भारीपन या हल्का सिरदर्द महसूस होना सामान्य है। यदि यह अधिक हो, तो जाप घटा दें। (Initial heaviness is normal; reduce chanting if it persists).
जबरदस्ती न करें (Do Not Force): ध्यान केंद्रित करते समय आँखों या माथे पर अत्यधिक जोर न डालें। सहजता से ध्यान लगाएं। (Focus gently without straining the eyes or forehead).
अनुभवों से न डरें (Do Not Fear Experiences): साधना के दौरान रोशनी दिखना या झनझनाहट होना स्वाभाविक है। इनसे घबराएं नहीं। (Experiencing light or tingling is natural; do not panic).
मानसिक एकाग्रता और स्मरण शक्ति में तीव्र वृद्धि होती है। (Sharp increase in mental concentration and memory).
अंतर्ज्ञान (Intuition / Sixth Sense) जागृत होने लगता है। (Awakening of intuition and the sixth sense).
निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और मानसिक तनाव एवं अशांति दूर होती है। (Strengthened decision-making ability and relief from mental stress).
यह साधना पूर्ण श्रद्धा, संयम और अनुशासन के साथ करने पर ही अपने पूर्ण परिणाम देती है।
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