साधना काल या रोगी चिकित्सा के समय स्वयं की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक कुशल साधक का पहला कर्तव्य है। यह मंत्र बंगाली उच्चारण की शक्ति से युक्त है, जो साधक के चारों ओर एक अभेद्य सुरक्षा कवच का निर्माण करता है।
इस प्रयोग को प्रभावी बनाने हेतु निम्नलिखित तीन चरणों का सावधानीपूर्वक पालन करें:
चरण 1 (पूर्वाभ्यास) / Step 1 (Preliminary Practice): किसी भी रोगी का उपचार शुरू करने से ठीक पहले इस मंत्र का शांत मन से पाठ प्रारंभ करें।
चरण 2 (रेखा बंधन) / Step 2 (Line Binding): मंत्र का निरंतर उच्चारण करते हुए भूमि (मिट्टी या फर्श) पर एक के बाद एक, लगातार 7 रेखाएँ खींचें।
चरण 3 (आसन ग्रहण) / Step 3 (Taking the Seat): जैसे ही सातों रेखाएँ पूरी खिंच जाएँ, मंत्र को विराम दें और स्वयं उन खींची हुई रेखाओं के भीतर (ऊपर) अपना आसन लगाकर बैठ जाएँ।
अपने स्थान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह सरल प्रक्रिया अपनाएं:
विधि / Method: किसी भी लोहे की वस्तु पर इस मंत्र का 7 बार जप करके उसे सिद्ध (अभिमंत्रित) कर लें।
घेरा / Protection Circle: अभिमंत्रित वस्तु का उपयोग करते हुए अपने चारों ओर एक सुरक्षा रेखा (घेरा) खींच दें।
प्रभाव / Effect: इस अभिमंत्रित घेरे के भीतर कोई भी नकारात्मक या तामसिक शक्ति प्रवेश करने में पूर्णतः असमर्थ होगी।
No review given yet!
Fast Delivery all across the country
Safe Payment
7 Days Return Policy
100% Authentic Products