बृहस्पति (गुरु) देव ज्ञान, भाग्य, अध्यात्म और सौभाग्य के कारक हैं। इनकी साधना वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति और उच्च शिक्षा के लिए अत्यंत मंगलकारी है।
ध्यान मंत्र (Dhyana Mantra):
"ओँ द् वभुजो गौराङ्गपीताम्बरधरो गुरुः पीताम्बरः सरोरुहहस्तः। दक्षाभयप्रदकरो बरदश्च देवो गुरुः सुराणामथ दैत्यानां च पूिजतः।।"
पूजा मंत्र (Puja Mantra):
"ओँ ह्रीं श्रीं बृहस्पतये नमः।"
प्रणाम मंत्र (Pranama Mantra):
"देवानाञ्च ऋषीणाञ्च गुरुं काञ्चनसिन्नभम्। बुद् धभूतं त्रलोकेशं तं नमा म बृहस्प तम्।।"
जाप संख्या (Chanting Count): कुल 19,000 (उन्नीस हजार) मंत्र जाप। कलियुग के विधान के अनुसार 76,000 मंत्र जाप का लक्ष्य रखें।
समय (Timing): प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय का समय)।
वस्त्र एवं आसन का रंग (Dress & Asana Color): पीले रंग के वस्त्र और पीला आसन।
जाप की माला (Chanting Beads): हल्दी की गांठों की माला, पीले अकीक (Yellow Agate) की माला या पुखराज की माला।
विशेष क्रिया (Special Ritual): गुरु देव को केसर का तिलक लगाएं, स्वयं भी मस्तक पर केसर लगाएं और चने की दाल व गुड़ का भोग अर्पित करें।
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