यह प्रयोग भगवान गरुण की दिव्य शक्ति से प्रेरित है। यह मार्ग में आने वाले सूक्ष्म भयों, कांटों (कंटक) और अदृश्य विषैले कीटों-पतंगों से पैरों की और साधक की रक्षा करने की एक अत्यंत त्वरित तांत्रिक क्रिया है।
यात्रा पर निकलते समय या किसी विशेष मार्ग से गुजरने हेतु निम्नलिखित नियमों का पालन करें:
विधि / Method: घर, आश्रम या विश्राम स्थल से बाहर निकलते समय पूर्ण श्रद्धा के साथ 1 बार मंत्र का पाठ करें।
ताली वादन / Clapping Ritual: मंत्र पूर्ण होते ही तुरंत आकाश की ओर मुख करके स्पष्ट रूप से 3 बार ताली बजाएं। यह क्रिया मंत्र की ऊर्जा को तत्काल सक्रिय कर देती है।
अपने विश्राम स्थल या निवास को नकारात्मक शक्तियों व विषैले जीवों से सुरक्षित रखने के लिए यह प्रयोग करें:
विधि / Method: किसी भी लोहे की वस्तु पर इस मंत्र का 7 बार जप करके उसे सिद्ध (अभिमंत्रित) कर लें।
घेरा / Protection Circle: उस अभिमंत्रित वस्तु का उपयोग करते हुए अपने चारों ओर एक सुरक्षा रेखा (घेरा) खींच दें।
प्रभाव / Effect: इस अभिमंत्रित घेरे के भीतर कोई भी नकारात्मक शक्ति या विषैले कीट प्रवेश करने में पूर्णतः असमर्थ होंगे।
मार्ग सुरक्षा: यात्रा मार्ग में मिलने वाले कांटों, विषैले कीड़े-मकोड़ों, डंक मारने वाले जीवों और अज्ञात मार्ग-भयों का नाश होता है।
निर्विघ्न यात्रा: यह सुरक्षा कवच यात्रा को कष्टरहित और पूर्णतः निर्विघ्न बनाता है।
त्वरित बचाव: यह प्रयोग अत्यंत सरल है और संकट काल में तुरंत रक्षा करने में सक्षम है।
नकारात्मकता से मुक्ति: यह घेरा किसी भी प्रकार की तामसिक शक्ति या नकारात्मक बाधाओं को आपके कार्यक्षेत्र में प्रवेश करने से रोकता है।
साधक हेतु विशेष परामर्श: "सही मार्गदर्शन ही साधना की सफलता का आधार है। अपनी यात्रा को मंत्र शक्ति से सुरक्षित और मंगलमय बनाएं।"
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