Silver Naag Naagin Murti Pair | Sacred Puja Idol for Shiv Puja, Nag Panchami & Mandir Décor
सिल्वर नाग-नागिन जोड़ा (Silver Nag-Nagin Couple) भारतीय ज्योतिष शास्त्र और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में एक अत्यंत शक्तिशाली और पूजनीय वस्तु मानी जाती है।
सिल्वर नाग-नागिन जोड़ा चांदी की धातु से बनी हुई दो आकृतियाँ होती हैं, जो नाग (नर सर्प) और नागिन (मादा सर्प) के जोड़े का प्रतिनिधित्व करती हैं। भारतीय संस्कृति में सर्प को भगवान शिव का भूषण, शेषनाग को भगवान विष्णु का आसन और पाताल लोक का स्वामी माना गया है। यह जोड़ा मुख्य रूप से 'कालसर्प दोष', 'पितृ दोष' और वास्तु दोषों को शांत करने के लिए उपयोग किया जाता है।
धातु का चयन: इसका निर्माण शुद्ध चांदी (Silver) से किया जाता है। चांदी को 'चंद्रमा' का कारक और अत्यंत शीतल, सात्विक एवं पवित्र धातु माना गया है। यह धातु सकारात्मक ऊर्जा को धारण करने और प्रवाहित करने में अद्भुत क्षमता रखती है।
निर्माण प्रक्रिया: * ढलाई या नक्काशी: इसे या तो सांचे में ढालकर बनाया जाता है या फिर चांदी की चादर को तराशकर नाग और नागिन की आकृति उकेरी जाती है।
बारीकियां: इसमें सांप के फन, आँखों और शरीर के शल्कों (scales) को बहुत बारीकी से उकेरा जाता है ताकि यह देखने में जीवंत लगे।
पॉलिशिंग: अंत में इसे अच्छी तरह से पॉलिश किया जाता है ताकि चांदी अपनी प्राकृतिक चमक और शुद्धता को बरकरार रखे।
ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से इसके कई महत्वपूर्ण लाभ हैं:
कालसर्प दोष का निवारण: यदि किसी की जन्म कुंडली में कालसर्प दोष हो, तो किसी योग्य ज्योतिषी के परामर्श से इस चांदी के जोड़े को शिवलिंग पर अर्पित करने या प्रवाहित करने से दोष के अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति: पितृ दोष के कारण परिवार में आ रही रुकावटों, बीमारी या वंश वृद्धि में बाधाओं को दूर करने के लिए चांदी के नाग-नागिन जोड़े को विधि-विधान से पूजा कर विसर्जित करना बहुत शुभ माना जाता है।
वास्तु दोष शांति: घर की नींव में, मुख्य द्वार की चौखट के नीचे या घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में इसे दबाने से घर का वास्तु दोष शांत होता है और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
शत्रु बाधा और सुरक्षा: यह घर को ऊपरी हवाओं, बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से बचाता है।
आध्यात्मिक स्थिरता: चांदी की शीतलता के कारण, इसे घर में स्थापित करने से मन में शांति बनी रहती है और घर का वातावरण सकारात्मक रहता है।
नाग-नागिन का जोड़ा कोई सामान्य सजावट की वस्तु नहीं है, यह एक 'उपाय' है।
इसे कभी भी स्वयं अपनी मर्जी से कहीं भी न रखें। इसे हमेशा किसी अनुभवी पंडित या ज्योतिषी से मुहूर्त निकलवाकर और शास्त्रोक्त विधि (पंचामृत स्नान, मंत्र उच्चारण) के अनुसार ही स्थापित करना चाहिए।
यदि इसे शिवलिंग पर अर्पित करना हो, तो उसके लिए भी सही विधि का पालन करना अनिवार्य है।
एक रोचक तथ्य: ज्योतिष में चांदी को 'चंद्र ग्रह' से जोड़ा गया है। चूंकि सर्प भगवान शिव (जिनके मस्तक पर चंद्रमा है) के अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए चांदी का नाग-नागिन जोड़ा शिव कृपा प्राप्त करने का भी एक सशक्त माध्यम माना जाता है।
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